त्रिपुरा

हाईवे और रेलवे को बार बार जाम करना मंजूर नहीं सुदीप रॉय बर्मन

nidhi
5 Sept 2026 2:37 PM IST
हाईवे और रेलवे को बार बार जाम करना मंजूर नहीं सुदीप रॉय बर्मन
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सुदीप रॉय बर्मन की दो टूक हाईवे रेलवे जाम स्वीकार नहीं

अगरतला: त्रिपुरा में आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व उग्रवादियों के 72 घंटे के रेल और सड़क जाम के बीच कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने आंदोलन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मांगों को लेकर बार-बार रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे आम लोगों, गंभीर मरीजों और जरूरी काम से यात्रा करने वालों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

72 घंटे के बंद पर उठाए सवाल
आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व उग्रवादियों के एक मंच ने अपनी मांगों को लेकर 72 घंटे के रेल और सड़क जाम का आह्वान किया है। शनिवार को आंदोलन दूसरे दिन में प्रवेश कर गया और इसके कारण राज्य के कुछ हिस्सों में रेल तथा सड़क यातायात प्रभावित हुआ। आंदोलनकारी मुख्य रूप से पुनर्वास और शांति समझौते से जुड़ी मांगों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि जब 72 घंटे के रेल और सड़क जाम की घोषणा पहले ही हो चुकी थी, तब प्रशासन को इसे गंभीरता से लेते हुए समय रहते समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए थी।
'आम लोगों को तकलीफ क्यों दी जाए?'
कांग्रेस विधायक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को वैकल्पिक तरीके अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि जरूरत पड़े तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर सकते हैं। उनका कहना था कि आंदोलनकारी स्वयं संघर्ष करें, लेकिन आम लोगों को उसकी परेशानी न उठानी पड़े।
मरीजों और यात्रियों की बढ़ी परेशानी
रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो सकती है जिन्हें इलाज या किसी जरूरी काम के लिए यात्रा करनी है। बर्मन ने विशेष रूप से गंभीर रूप से बीमार मरीजों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के जाम से उनका अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सड़क और रेल संपर्क को बार-बार बाधित करना विरोध प्रदर्शन का नियमित तरीका नहीं बनना चाहिए।
पुनर्वास में पारदर्शिता की मांग
सुदीप रॉय बर्मन ने आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व उग्रवादियों के पुनर्वास की मांग को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वास्तव में हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है, उनकी जायज मांगों पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों को विचार करना चाहिए।
हालांकि उन्होंने पुनर्वास लाभ देने में पारदर्शिता पर जोर दिया। बर्मन के मुताबिक यह सत्यापित किया जाना चाहिए कि वास्तव में कितने लोगों ने आत्मसमर्पण किया था, उस समय कितने हथियार जमा किए गए और संबंधित लोगों के खिलाफ कौन-कौन से मामले दर्ज थे। इन्हीं रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक लाभार्थियों की पहचान होनी चाहिए।
फर्जी नामों को लाभ देने का किया विरोध
कांग्रेस विधायक ने कहा कि यदि पुनर्वास लाभ के लिए हजारों नाम सामने आते हैं तो उनके चयन का स्पष्ट और प्रमाणित आधार होना चाहिए। बिना आधिकारिक रिकॉर्ड या हथियार जमा करने के प्रमाण के केवल दावों के आधार पर पुनर्वास राशि नहीं दी जानी चाहिए।
उनका कहना है कि वास्तविक रूप से आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन में लौटे लोगों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए, लेकिन इस प्रक्रिया में फर्जी लाभार्थियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
बर्मन ने प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक की आंदोलनकारियों से बातचीत के बाद उम्मीद थी कि जाम वापस ले लिया जाएगा, लेकिन आंदोलन जारी रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थिति को हल करने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप जमीन पर दिखाई नहीं दिया।
सुदीप रॉय बर्मन ने केंद्र और राज्य सरकार से आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व उग्रवादियों की वास्तविक मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों से कहा कि अपनी मांगों के लिए आंदोलन जरूर करें, लेकिन रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग को बार-बार बाधित करके आम जनता को परेशानी में डालना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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