
Tripura त्रिपुरा: नॉर्थ-ईस्ट राज्यों के रीजनल रूरल बैंकों (RRBs) ने पिछले दस वर्षों में अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी दी कि इन बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) रेश्यो घटकर 4.9 प्रतिशत पर आ गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है।
इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इन बैंकों ने कुल 560 करोड़ रुपये का प्रोविजनल संयुक्त शुद्ध लाभ दर्ज किया है। यह आंकड़ा क्षेत्रीय बैंकिंग प्रणाली की वित्तीय स्थिति में सुधार का संकेत देता है।
अधिकारियों के अनुसार, नॉर्थ-ईस्ट में कार्यरत सात क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। यह बढ़ोतरी न केवल लाभ में सुधार को दर्शाती है, बल्कि परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार का संकेत देती है।
इन उपलब्धियों की समीक्षा के लिए अगरतला में एक क्षेत्रीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने की। बैठक में नॉर्थ-ईस्ट RRBs के प्रदर्शन, ऋण वसूली, वित्तीय स्थिरता और आगे की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बेहतर प्रबंधन, डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के विस्तार और ऋण अनुशासन में सुधार के कारण इन बैंकों की स्थिति मजबूत हुई है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के प्रयासों ने भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि आने वाले समय में RRBs की क्षमता बढ़ाने, तकनीकी सुधारों को अपनाने और कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक समर्थन देने पर जोर दिया जाएगा।
इस प्रदर्शन को नॉर्थ-ईस्ट की बैंकिंग व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।





