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त्रिपुरा यूनिवर्सिटी से डॉ. सुमोन अली की अपील
अगरतला: त्रिपुरा यूनिवर्सिटी के गेस्ट फैकल्टी डॉ. सुमोन अली ने अपनी सेवा समाप्त करने के आदेश को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला लेने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने और बचाव का उचित अवसर दिया जाए। 6 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक अली ने विश्वविद्यालय के फैसले पर पुनर्विचार की अपील की है।
डॉ. सुमोन अली त्रिपुरा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ एजुकेशन में गेस्ट फैकल्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार वे इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन, इंडियन पॉलिटिकल थॉट और इंटरनेशनल रिलेशंस एंड पॉलिटिक्स जैसे विषय पढ़ाते रहे हैं। विश्वविद्यालय की हालिया वार्षिक रिपोर्ट में भी उनका नाम गेस्ट फैकल्टी के रूप में दर्ज है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब 1 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व मुख्य रूप से एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने किया और इसमें इंटीग्रेटेड मास्टर्स तथा मास्टर्स पाठ्यक्रम के छात्र भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने डॉ. अली पर छात्राओं के साथ कथित अनुचित व्यवहार और आपत्तिजनक प्रस्ताव देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
डॉ. अली ने इन आरोपों से साफ इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हैं और वह किसी भी निष्पक्ष जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन मामले की उचित जांच कराए और तथ्य सामने आने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचे।
अब सेवा समाप्ति से जुड़े आदेश के बाद उन्होंने प्रशासन से इसे वापस लेने की मांग की है। उनका पक्ष है कि किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से पहले उन्हें आरोपों की पूरी जानकारी, संबंधित सामग्री और अपना बचाव पेश करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। मामले को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्ट में उनकी इसी मांग को प्रमुखता से दर्ज किया गया है।
मामले में आरोप गंभीर हैं, लेकिन अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। छात्र पक्ष ने जहां कार्रवाई की मांग की है, वहीं डॉ. अली ने सभी आरोपों को नकारते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है। ऐसे में अब निगाह विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर डॉ. सुमोन अली का नाम अभी भी गेस्ट फैकल्टी सूची में दिखाई देता है। हालांकि वेबसाइट पर नाम बने रहने मात्र से उनकी वर्तमान सेवा स्थिति की पुष्टि नहीं होती, क्योंकि प्रशासनिक आदेश और वेबसाइट अपडेट के बीच समय का अंतर हो सकता है।
अब यह देखना होगा कि त्रिपुरा यूनिवर्सिटी उनके पुनर्विचार अनुरोध पर क्या फैसला लेती है और क्या मामले की जांच के लिए कोई अलग समिति या औपचारिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और सेवा समाप्ति संबंधी आदेश पर प्रशासन का अंतिम रुख क्या होगा।
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