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विरोध मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस का एक्शन
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विरोध मार्च के दौरान त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता माणिक सरकार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ CPI(M) नेता जितेंद्र चौधरी और पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद विरोध मार्च और पुलिस की कार्रवाई चर्चा में आ गई है।
माणिक सरकार त्रिपुरा की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री पद पर रहे और वामपंथी राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वहीं, जितेंद्र चौधरी भी त्रिपुरा में CPI(M) के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में दोनों नेताओं को दिल्ली में विरोध मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने की घटना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विरोध मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली में आयोजित विरोध मार्च के दौरान पुलिस ने माणिक सरकार, जितेंद्र चौधरी और CPI(M) के अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि मार्च किस स्थान से शुरू हुआ था और प्रदर्शनकारियों ने किस मार्ग से आगे बढ़ने की योजना बनाई थी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने नेताओं को किस आधार पर हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए अन्य नेताओं की पूरी सूची और उन्हें कहां ले जाया गया, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को लेकर कड़ी सुरक्षा
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठे विवाद से जुड़ा है। प्रदर्शन के आयोजकों ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने चुनावी हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। प्रमुख सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए और प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने वाले रास्तों पर निगरानी की गई। पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही थी।
कई राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया गया
दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान अन्य वामपंथी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और के. एन. बालगोपाल को भी जंतर-मंतर के पास हिरासत में लिया गया। CPI(M) ने पुलिस की इस कार्रवाई की आलोचना की। इसी बीच त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार और जितेंद्र चौधरी को हिरासत में लिए जाने की सूचना ने भी ध्यान खींचा है। हालांकि, इन दोनों नेताओं की हिरासत की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध समाचार स्रोतों से नहीं हो सकी है।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं को हिरासत में लेने के घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज कर दी है। CPI(M) सहित विपक्षी दलों ने प्रदर्शनकारियों पर प्रतिबंध और हिरासत की कार्रवाई का विरोध किया है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाने की बात कही है। पुलिस के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।
हिरासत से जुड़ी आगे की जानकारी का इंतजार
माणिक सरकार और जितेंद्र चौधरी को लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें कितनी देर तक हिरासत में रखा गया या बाद में रिहा कर दिया गया। दोनों नेताओं के संबंध में पुलिस की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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