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वन उत्पादों के व्यापार कमाई की और जैविक विविधता अधिनियम 2002 के तहत जैव विविधता संसाधनों से लाभान्वित हुए।
त्रिपुरा। त्रिपुरा के 48 गांवों के वन-निवासी समुदायों ने गैर-इमारती वन उपज (एनटीईपी) के व्यापार के लिए स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समिति (बीएमसी) के माध्यम से 2022 से 23 वित्तीय वर्ष की पहली दो तिमाहियों में 2.35 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की है। सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार जंगल के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों ने 2019-20 में 7.47 करोड़ रुपये, 2020-21 में 2.09 करोड़ रुपये और 2021-22 में 5.23 करोड़ रुपये वन उत्पादों के व्यापार कमाई की और जैविक विविधता अधिनियम 2002 के तहत जैव विविधता संसाधनों से लाभान्वित हुए।
राज्य वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि त्रिपुरा एक दशक से स्थानीय लोगों को वनों की वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों के सरंक्षण के प्रति जागरूक करते आ रहे हैं। त्रिपुरा जैव विविधता बोर्ड ने अब तक इस वर्ष छाता और बैग के हैंडल के लिए झाड़ू-घास, गंडकी, और बांस की छड़ियों की व्यावसायिक बिक्री की सुविधा प्रदान की है, हालांकि प्राकृतिक रूप से उच्च मूल्य वाले वन प्रचुर मात्रा में उगाए गए हैं। जंगलों में उपलब्ध उत्पाद जिनमें काली मिर्च, बोरो-इलाची, बंगफाई और कम से कम पांच अलग-अलग प्रकार के बांस शामिल हैं।
एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा, वनवासियों सहित ग्रामीण समुदायों के लिए विभिन्न विभागों के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अलावा कई सामुदायिक विकास परियोजनाएं हैं। जिनका उद्देश्य स्थायी आजीविका को ढांचे में लाना है। उन्होंने कहा कि अधिकांश गांवों में वन संसाधनों की पहुंच और लाभ साझा करने की रूपरेखा तैयार की गयी है। मुख्यमंत्री ने 14 वें वित्त आयोग से जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन के लिए 1,250 करोड़ रुपये के अनुदान के साथ 2,125 करोड़ रुपये के हरित बोनस की मांग की है। इसके बाद, वैश्विक समुदाय के लिए भारत की अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार, कार्बन स्टॉक को बढ़ाने और अल्पकालिक-वानिकी-आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से त्रिपुरा ने वन प्रबंधन और वन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए स्थायी जलग्रहण के लिए एक हजार करोड़ रुपये की जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) सहायता प्राप्त की।
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