त्रिपुरा

MBBS परीक्षा में निराशाजनक नतीजे, 445 में से 149 छात्र असफल

nidhi
12 Oct 2026 2:12 PM IST
MBBS परीक्षा में निराशाजनक नतीजे, 445 में से 149 छात्र असफल
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मेडिकल छात्रों को बड़ा झटका
मेडिकल शिक्षा: तीन मेडिकल कॉलेजों के परीक्षा परिणामों ने चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों मेडिकल कॉलेजों में कुल मिलाकर केवल 66.51 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा में सफल हुए हैं। इनमें शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज का परिणाम विशेष रूप से कमजोर बताया गया है।
इन आंकड़ों के अनुसार, परीक्षा में शामिल कुल विद्यार्थियों में से लगभग एक-तिहाई सफल नहीं हो सके। परिणाम सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और छात्रों को मिलने वाली शैक्षणिक सहायता जैसे विषय महत्वपूर्ण हो गए हैं।
त्रिपुरा के तीन मेडिकल कॉलेजों के नतीजे जारी
अगरतला। त्रिपुरा के तीन मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा के परिणाम सामने आए हैं। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, कुल 445 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, जिनमें 296 सफल हुए, जबकि 149 विद्यार्थी पास नहीं हो सके। इस तरह कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 66.51 रहा। इन परिणामों में त्रिपुरा शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज का प्रदर्शन सबसे कमजोर बताया गया है। यहां परीक्षा में शामिल आधे से अधिक विद्यार्थी सफल नहीं हो सके।
शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज में 85 विद्यार्थी फेल
त्रिपुरा शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज से कुल 168 विद्यार्थी एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें केवल 83 विद्यार्थी पास हुए, जबकि 85 विद्यार्थी असफल रहे। कॉलेज का उत्तीर्ण प्रतिशत लगभग 49.40 रहा। यानी परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों में आधे से भी कम सफल हो सके। इस परिणाम के बाद कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सहायता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में 75.64% छात्र पास
त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में कुल 156 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें 118 विद्यार्थी पास हुए और 38 असफल रहे। कॉलेज का उत्तीर्ण प्रतिशत 75.64 रहा, जो शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज से बेहतर है। हालांकि, यहां भी लगभग एक-चौथाई विद्यार्थी परीक्षा में सफल नहीं हो सके।
सरकारी मेडिकल कॉलेज का प्रदर्शन बेहतर
अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का परिणाम दोनों निजी संस्थानों की तुलना में बेहतर बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट में यहां लगभग 80 प्रतिशत विद्यार्थियों के सफल होने की बात कही गई है। सरकारी कॉलेज के परीक्षार्थियों और सफल विद्यार्थियों की पूरी संस्थानवार संख्या स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए इसके विस्तृत परिणाम की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर उठे सवाल
परीक्षा परिणामों के बाद मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता, प्रयोगशाला सुविधाओं, व्यावहारिक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की शैक्षणिक सहायता पर चर्चा शुरू हुई है।चिकित्सा शिक्षा में केवल सैद्धांतिक पढ़ाई ही नहीं, बल्कि प्रयोगशाला प्रशिक्षण और विषयों की व्यावहारिक समझ भी महत्वपूर्ण होती है। कमजोर परीक्षा परिणामों के कारणों को समझने के लिए विद्यार्थियों की तैयारी, परीक्षा के स्तर और कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है। किसी कॉलेज में अधिक विद्यार्थियों के असफल होने से अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वहां शिक्षकों या सुविधाओं की कमी है। इसके लिए अलग से जांच और प्रमाणित जानकारी आवश्यक होगी।
विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला
एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रथम वर्ष की परीक्षा महत्वपूर्ण होती है। इसमें सफलता आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी शैक्षणिक आधार तैयार करती है।तीनों कॉलेजों के परिणामों ने विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता और कमजोर विषयों में सुधार के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत को रेखांकित किया है। फिलहाल प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, तीनों मेडिकल कॉलेजों में कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 66.51 रहा है। इनमें शांतिनिकेतन मेडिकल कॉलेज का परिणाम सबसे कमजोर बताया गया है।
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