त्रिपुरा

त्रिपुरा में 72 घंटे की हाईवे नाकेबंदी की कोशिश नाकाम

Ratna Netam
17 Oct 2026 4:55 PM IST
त्रिपुरा में 72 घंटे की हाईवे नाकेबंदी की कोशिश नाकाम
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अगरतला। त्रिपुरा में आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों की ओर से घोषित 72 घंटे की राष्ट्रीय राजमार्ग नाकेबंदी को शनिवार को पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विफल कर दिया। नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF) से जुड़े पूर्व उग्रवादियों ने असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग-8 को बाधित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर करीब 15 से 20 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान बारामुरा के चंद्र साधुप पारा इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही। प्रशासन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है।
महा सप्तमी के दिन हाईवे जाम करने पहुंचे प्रदर्शनकारी
जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर 17 अक्टूबर से 72 घंटे के लिए राजमार्ग नाकेबंदी का ऐलान किया था।इसी कार्यक्रम के तहत शनिवार सुबह प्रदर्शनकारी बारामुरा पहाड़ी क्षेत्र के चंद्र साधुप पारा और हताई कोटर इलाके में एकत्र होने लगे।प्रदर्शनकारियों की योजना असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित करके सरकार का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना था। पुलिस को इस गतिविधि की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया।
पुलिस और प्रशासन ने मौके पर संभाला मोर्चा
सूचना मिलने के बाद जिरानिया उपमंडल प्रशासन के डिप्टी कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें सड़क खाली करने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील की।पुलिस अधिकारी सुनिर्मल देबनाथ के अनुसार, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को राजमार्ग बाधित नहीं करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कुछ लोग सड़क पर प्रदर्शन करने पर अड़े रहे।इसके बाद पुलिस ने यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की।
15 से 20 पूर्व उग्रवादी हिरासत में लिए गए
त्रिपुरा पुलिस के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 5 बजकर 15 मिनट पर जिरानिया थाना क्षेत्र के हताई कोटर में 15 से 20 लोगों को हिरासत में लिया गया।हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को अगरतला के एडी नगर स्थित हिरासत केंद्र ले जाया गया।पुलिस ने बताया कि कार्रवाई का उद्देश्य राजमार्ग पर यातायात बाधित होने से रोकना और दुर्गा पूजा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित नाकेबंदी का असर राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल सेवाओं पर नहीं पड़ा।
कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल
पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया।इस घटना में दो पुलिस कांस्टेबल घायल हो गए। घायल जवानों की पहचान प्रसेनजीत दास और काजोल देबबर्मा के रूप में हुई है।दोनों पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।पुलिस ने कहा कि त्योहार के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी संगठन को प्रमुख परिवहन मार्गों पर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पुनर्वास से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन
पूर्व उग्रवादी संगठनों के सदस्य लंबे समय से पुनर्वास और सरकारी सहायता संबंधी मांगें उठा रहे हैं।प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें जिन सुविधाओं और आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया गया था, उनमें से कई मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं।सितंबर 2024 में केंद्र सरकार, त्रिपुरा सरकार और उग्रवादी संगठनों के बीच त्रिपक्षीय शांति समझौता हुआ था। इसके तहत उग्रवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने पर सहमति जताई थी।पूर्व उग्रवादियों के संगठनों का कहना है कि शांति समझौते में किए गए पुनर्वास संबंधी वादों को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।
पहले भी कर चुके हैं राजमार्ग नाकेबंदी
इससे पहले सितंबर 2026 में भी आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादी संगठनों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे मार्ग बाधित किए थे।उस दौरान सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ था। प्रदर्शनकारी आर्थिक पुनर्वास और अन्य सरकारी सुविधाओं की मांग कर रहे थे।अक्टूबर में दोबारा नाकेबंदी की घोषणा से प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, इस बार पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के कारण व्यापक यातायात व्यवधान नहीं हुआ।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सामान्य
प्रशासन के अनुसार, शनिवार की कार्रवाई के बाद असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रही।रेल सेवाओं के बाधित होने की भी सूचना नहीं है। दुर्गा पूजा को देखते हुए प्रमुख सड़कों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में बताई गई है। वहीं, पूर्व उग्रवादी संगठनों की पुनर्वास संबंधी मांगों का समाधान अभी बाकी है।
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