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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन ₹42 हजार करने की मांग
अगरतला: त्रिपुरा में आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स ऑर्गनाइजेशन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाने की मांग की है। संगठन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 42,000 रुपये और हेल्पर्स के लिए 30,000 रुपये प्रति माह का न्यूनतम वेतन तय करने की मांग रखी है। इसके साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद 21,000 रुपये मासिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की भी मांग की गई है। यह मांग संगठन के प्रतिनिधियों ने 4 अक्टूबर को अगरतला में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उठाई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एकीकृत बाल विकास सेवा यानी ICDS कार्यक्रम के 52वें स्थापना वर्ष के अवसर पर किया गया था। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर्स लंबे समय से बच्चों, माताओं और समुदायों से जुड़ी सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में भूमिका निभा रहे हैं। उनके मुताबिक जिम्मेदारियों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पारिश्रमिक और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है।
संगठन ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल मानदेय पाने वाले कर्मियों के बजाय वर्कर्स के रूप में मान्यता देने की मांग की। इसके तहत कार्यकर्ताओं के लिए न्यूनतम 42 हजार रुपये और सहायिकाओं के लिए 30 हजार रुपये मासिक भुगतान की मांग रखी गई है।
सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल है। प्रतिनिधियों ने 21 हजार रुपये मासिक पेंशन के साथ ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की मांग की। संगठन का कहना है कि दशकों तक सरकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़े रहने वाले कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
आंगनवाड़ी केंद्र ICDS के तहत बच्चों और माताओं से जुड़ी कई सेवाओं का जमीनी स्तर पर संचालन करते हैं। इनमें बाल पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा, मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण से जुड़े कार्य और समुदाय के बीच जागरूकता गतिविधियां शामिल हैं। संगठन के मुताबिक इन मूल जिम्मेदारियों के अलावा कर्मचारियों को रिकॉर्ड रखने, सर्वेक्षण, पोषण संबंधी गतिविधियों, स्वास्थ्य अभियानों और अलग-अलग सरकारी विभागों के साथ समन्वय का काम भी करना पड़ता है।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि कई आंगनवाड़ी केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं से संबंधित समस्याएं मौजूद हैं। खाद्य आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी, मोबाइल से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों और डिजिटल माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने में आने वाली परेशानियों का उन्होंने उल्लेख किया। संगठन का कहना है कि तकनीकी या आधारभूत ढांचे की समस्या के कारण लाभार्थी तक सेवा नहीं पहुंच पाने की स्थिति में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
आंगनवाड़ी कर्मियों से जुड़े सेवानिवृत्ति लाभ का मुद्दा त्रिपुरा में पहले भी न्यायिक स्तर पर सामने आ चुका है। अप्रैल 2026 में त्रिपुरा हाईकोर्ट के एक फैसले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से जुड़े सेवानिवृत्ति लाभ तथा ग्रेच्युटी के विवाद पर विचार किया गया था। अदालती रिकॉर्ड में त्रिपुरा सरकार की उस व्यवस्था का भी उल्लेख है, जिसके तहत 60 वर्ष की आयु के बाद न्यूनतम 10 साल की सेवा पूरी करने वाले AWW और AWH के लिए मासिक पेंशन तथा एकमुश्त वित्तीय लाभ का प्रावधान बताया गया था।
मौजूदा मांग में संगठन ने इसी तरह की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत और नियमित बनाने की मांग की है। प्रतिनिधियों ने केंद्र और त्रिपुरा सरकार से वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और कार्य परिस्थितियों पर तत्काल कदम उठाने की अपील की।
संगठन का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्र शुरुआती बाल देखभाल और पोषण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इसमें काम करने वाले कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी नए निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
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