त्रिपुरा

11 विधायक आज लेंगे मंत्री के रूप में शपथ, जानिए कौन-कौन होंगे साहा मंत्रिमंडल में शामिल

Renuka Sahu
16 May 2022 1:31 AM GMT
11 MLAs will take oath as ministers today, know who will be included in Sahas cabinet
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फाइल फोटो 

माणिक साहा ने रविवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। माणिक साहा ने रविवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नौ और आईपीएफटी के दो विधायकों सहित कुल 11 विधायक सोमवार को मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि आईपीएफटी के मेवार कुमार जमातिया को छोड़कर बिप्लब कुमार देब मंत्रिपरिषद के सभी मंत्रियों को नई मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है।

देब सरकार में आदिवासी कल्याण मंत्री रहे जमातिया और आईपीएफटी के प्रमुख एनसी देबबर्मा के बीच मतभेद की खबरें हाल में सामने आई थीं। राज्यपाल एसएन आर्य मुख्यमंत्री माणिक साहा, पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में राजभवन में एक कार्यक्रम में मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
सीएम साहा ने रविवार रात राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि जिष्णु देव वर्मा, एनसी देब बर्मा (आईपीएफटी), रतनलाल नाथ, प्रणजीत सिंह रॉय, मनोज कांति देब, संताना चकमा, राम प्रसाद पॉल, भगवान दास, सुशांत चौधरी, रामपाड़ा जमातिया और प्रेम कुमार रियांग (आईपीएफटी) राज्य के कैबिनेट मंत्री के तौर पर कल शपथ लेंगे।
माणिक साहा बने राज्य के 11वें मुख्यमंत्री
माणिक साहा ने त्रिपुरा के नए सीएम के तौर पर शपथ ली। वह राज्य के 11वें मुख्यमंत्री बने हैं। उन्हें बिप्लव देव के इस्तीफे का बाद भाजपा ने यह जिम्मेदारी सौंपी है। राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने शपथ समारोह में साहा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसी के साथ राज्य में करीब साढ़े तीन साल तक चले बिप्लब कुमार देब के शासन का अंत हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब समारोह में भाजपा के विधायकों और राज्य के अन्य मंत्रियों के साथ उपस्थित थे।
भाजपा ने अबतक पांच सीएम को बदला
भाजपा ने 2019 के बाद से गुजरात और कर्नाटक सहित पांच मुख्यमंत्रियों को बदला है। साहा पूर्वोत्तर से कांग्रेस के ऐसे चौथे पूर्व नेता हैं जो भाजपा में शामिल होने के बाद क्षेत्र में मुख्यमंत्री बनेंगे। यह इसका स्पष्ट संकेत है कि किसी भी नेता का चुनाव-संबंधी मूल्य पार्टी के लिए सर्वोपरि है।
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