
हैदराबाद : ब्रेन ट्यूमर अब पहले जैसी डरावनी बीमारी नहीं रही, क्योंकि वर्चुअल रियलिटी (VR) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों ने न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला दिया है। इन तकनीकों की मदद से न केवल ट्यूमर को अधिक सटीकता के साथ हटाया जा रहा है, बल्कि मरीजों की महत्वपूर्ण क्षमताओं जैसे बोलने की शक्ति, याददाश्त, शरीर की गति, समझने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को भी सुरक्षित रखा जा रहा है।
वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे, जो हर साल 8 जून को मनाया जाता है, के अवसर पर हैदराबाद के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन ने बताया कि भविष्य की न्यूरोसर्जरी पूरी तरह से इमर्सिव टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम गाइडेंस पर आधारित होगी। उनका कहना है कि अब इलाज सिर्फ सर्जरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहले से अधिक सटीक प्लानिंग और डिजिटल मॉडलिंग पर निर्भर हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सर्जरी शुरू होने से पहले ही डॉक्टर अब मरीज के मस्तिष्क का 3D, कलर-कोडेड मॉडल तैयार कर लेते हैं। VR हेडसेट की मदद से न्यूरोसर्जन दिमाग के भीतर वर्चुअल रूप से प्रवेश कर सकते हैं और महत्वपूर्ण न्यूरल पाथवे को प हले से मैप कर लेते हैं। इससे सर्जरी के दौरान जोखिम काफी कम हो जाता है और महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचने की संभावना घट जाती है।
ऑपरेशन थिएटर में अब एडवांस्ड रोबोटिक नेविगेशन सिस्टम और हाई-टेक माइक्रोस्कोप का उपयोग किया जा रहा है। ये सिस्टम सर्जनों को रियल-टाइम में मरीज के दिमाग की संरचना को हाई-डेफिनिशन 3D डिजिटल मॉडल के साथ मिलाकर देखने की सुविधा देते हैं। इससे डॉक्टर बेहद सटीकता के साथ ट्यूमर को हटाने में सक्षम हो जाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि पहले ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में कई तरह के जोखिम होते थे, जिनमें मरीज की बोलने या चलने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता था। लेकिन अब AI और VR तकनीक के उपयोग से यह जोखिम काफी हद तक कम हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित सिस्टम सर्जरी से पहले और दौरान डेटा का विश्लेषण करके डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है। यह तकनीक यह भी अनुमान लगाने में सक्षम है कि ट्यूमर किस हिस्से को प्रभावित कर सकता है और किस क्षेत्र को बचाना सबसे जरूरी है।
हैदराबाद के न्यूरोसर्जनों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक और अधिक उन्नत होगी और ब्रेन ट्यूमर का इलाज पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, तेज और प्रभावी हो जाएगा।
इस तरह, VR और AI जैसी तकनीकें न्यूरोसर्जरी को एक नए युग में ले जा रही हैं, जहां जटिल मस्तिष्क रोगों का इलाज अधिक सटीकता और कम जोखिम के साथ संभव हो पा रहा है।





