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HYDERABAD हैदराबाद – भारतीय सेना के साउदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने हैदराबाद में प्रमुख रक्षा उद्योगों अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और ज़ेन टेक्नोलॉजीज का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने इन उद्योगों की उन्नत रक्षा विनिर्माण (Advanced Defence Manufacturing) और अनुसंधान एवं विकास (R&D) में भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के अनुरूप हैं और देश को आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में सशक्त बना रहे हैं।
ज़ेन टेक्नोलॉजीज में आधुनिक रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन
ज़ेन टेक्नोलॉजीज के दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन कराया गया। इसमें काउंटर-ड्रोन सॉल्यूशंस, लूटर म्यूनिशन, रिमोट-कंट्रोल्ड वेपन सिस्टम्स, टैक्टिकल एंगेजमेंट सिस्टम्स, एडवांस कॉम्बैट ट्रेनिंग सिमुलेटर्स और कंटेनराइज्ड स्मॉल आर्म्स रेंजेस शामिल थे। इन तकनीकों को आधुनिक युद्ध और प्रशिक्षण की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस का पोर्टफोलियो
इसके बाद उन्होंने अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस का दौरा किया, जहां कंपनी के विविध रक्षा समाधानों का परिचय कराया गया। इसमें एडवांस यूएवी (Unmanned Aerial Vehicles), ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स, मिसाइलें, स्मॉल आर्म्स, डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और गोला-बारूद निर्माण शामिल हैं। सेना प्रमुख ने इन प्रयासों को भारत की रक्षा क्षमता बढ़ाने और हैदराबाद को डिफेंस टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित करने वाला बताया।
उद्योग-सेना सहयोग पर जोर
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस अवसर पर भारतीय सेना की टेक एब्जॉर्प्शन (Technology Absorption) नीति पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत रक्षा-उद्योग सहयोग और इंडस्ट्री–अकादमिक–मिलिट्री पार्टनरशिप के माध्यम से ही आत्मनिर्भरता और नवाचार को गति दी जा सकती है।
उन्होंने रक्षा अनुसंधान में नवाचार, उद्यमिता और अनुसंधान-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भारतीय सशस्त्र बल बदलते सुरक्षा परिदृश्यों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।
हैदराबाद: रक्षा तकनीक का उभरता केंद्र
उन्होंने विश्वास जताया कि हैदराबाद रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां कार्यरत कंपनियां न केवल भारत की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं बल्कि वैश्विक रक्षा क्षेत्र में भारत की पहचान को मजबूत भी कर रही हैं।
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