
TELANGANA तेलंगाना में यूरिया की भारी कमी ने कृषि क्षेत्र को संकट में डाल दिया है। इस कमी से खरीफ सीजन प्रभावित हुआ है और महबूबाबाद, हनुमकोंडा, सिद्दीपेट, जोगुलंबा गड़वाल सहित कई जिलों में किसानों के विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। धान, मक्का और कपास जैसी फसलों के लिए जरूरी नाइट्रोजन आधारित यूरिया की कमी से किसान चिंतित हैं। सरकारी जल परियोजनाओं जैसे श्रीराम सागर प्रोजेक्ट और काकतीय नहर से पानी की आपूर्ति से खरीफ कार्यों में मदद मिली, लेकिन रामगुंडम फर्टिलाइजर्स (RFCL) में पाइपलाइन लीकेज के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से रुका और आपूर्ति में और कमी आई। इससे फसल उत्पादन में 10–15 प्रतिशत गिरावट का खतरा है।
तेलंगाना को खरीफ 2025 के लिए 10.48 लाख मीट्रिक टन यूरिया चाहिए था, लेकिन केंद्र ने केवल 9.8 लाख टन आवंटित किया और अप्रैल–अगस्त के बीच 6 लाख टन से कम ही पहुँचा। अगस्त में 3.5 लाख टन की आवश्यकता थी, लेकिन केवल 1.7 लाख टन ही प्राप्त हुआ। महबूबाबाद में 40,500 टन की मांग में केवल 18,100 टन मिले, हनुमकोंडा में 29,174 टन की तुलना में 16,943 टन और जोगुलंबा गड़वाल में 14,900 टन ही उपलब्ध थे।किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, हाईवे जाम किए और लंबी कतारों में यूरिया लेने की कोशिश की। सिद्दीपेट के हाइमदनगर में किसानों ने पीएसीएस स्टाफ पर काले बाजारी का आरोप लगाया, यूरिया के दाम 350–400 रुपये प्रति बैग तक पहुँच गए, जबकि सब्सिडी वाला दाम 266.50 रुपये था।
खरीफ सीजन में 45 लाख एकड़ में धान, 5.97 लाख एकड़ में मक्का और 44.64 लाख एकड़ में कपास की बुआई हुई है, लेकिन यूरिया की कमी से महत्वपूर्ण विकास चरण प्रभावित हो रहे हैं। महबूबाबाद में 2.21 लाख एकड़ लक्ष्य में केवल 1.16 लाख एकड़ में धान की बुआई हो सकी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हैं। राज्य कृषि मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव ने केंद्र पर अप्रैल–अगस्त में 8.3 लाख टन यूरिया न पहुँचाने का आरोप लगाया, जबकि केंद्रीय मंत्री नड्डा और बीजेपी नेता कहते हैं कि केंद्र ने 2024–25 रबी सीजन में 10.02 लाख टन सप्लाई की थी। किसानों के बीच काला बाजारी और स्टॉक जमाकर रखने की शिकायतें भी बढ़ गई हैं।





