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TELANGANA तेलंगाना: वारणगल और खम्मम जिलों में यूरिया की लगातार किल्लत ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। वारणगल के एक किसान द्वारा कपास की पूरी फसल उखाड़ फेंकने की घटना ने राज्यभर में किसानों की समस्याओं को उजागर कर दिया है। वहीं, खम्मम में किसान संगठनों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर सरकार से तुरंत यूरिया उपलब्ध कराने की मांग उठाई। वारणगल जिले के परवतगिरी मंडल के चिंथा नेककोंडा गांव के किसान भुक्या हेमला ने अपनी कपास की फसल मजदूरों की मदद से उखाड़ दी। खेत से कपास की हरियाली हटाते हुए उनका गुस्सा छलक पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
हेमला का कहना है कि बार-बार शिकायतों और सरकारी आश्वासनों के बावजूद यूरिया की आपूर्ति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पर्याप्त खाद न मिलने के कारण उनकी कपास की फसल कमजोर पड़ गई और पैदावार की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है। "मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी किसानों से किए वादों को निभाने में विफल रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने किसानों से विश्वासघात किया है," हेमला ने आरोप लगाया। भुक्या हेमला ने कहा कि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा है। उन्होंने ऋण लेकर कपास की बुवाई की थी और समय पर खाद की आपूर्ति न होने से पूरा निवेश दांव पर लग गया। "हम जैसे छोटे किसान सरकार पर भरोसा करके ही काम करते हैं। लेकिन अगर सरकार हमारी न्यूनतम ज़रूरत भी पूरी नहीं कर सकती तो हम कैसे जिंदा रहेंगे?" उन्होंने भावुक होकर कहा।
यह घटना केवल एक किसान की नहीं, बल्कि प्रदेश के कई किसानों की सामूहिक पीड़ा को सामने लाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यूरिया की अनुपलब्धता पिछले कई हफ्तों से गंभीर समस्या बनी हुई है। उधर, खम्मम जिले के वायरा में स्थिति और भी गंभीर है। यहां तेलंगाना रयथू संगम के जिला सचिव बोंथु रामबाबू ने आरोप लगाया कि पिछले 15 दिनों से प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS) में यूरिया की आपूर्ति नहीं हुई है। इस समस्या के विरोध में रयथू संगम कार्यकर्ताओं और किसानों ने शुक्रवार को सोसाइटी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि अगर जल्द आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मण्डल कृषि अधिकारी और सोसाइटी के सीईओ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार तुरंत प्रभाव से यूरिया उपलब्ध कराए, अन्यथा किसान अपनी बर्बादी के लिए मजबूर होकर बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। रामबाबू ने कहा, “सरकार किसानों को सिर्फ चुनाव के समय याद करती है। जब किसानों को खेती के लिए खाद और बीज की जरूरत होती है तब उनकी समस्याओं को दरकिनार कर दिया जाता है। यदि यही हालात रहे तो उत्पादन पर गहरा असर पड़ेगा और राज्य की कृषि व्यवस्था चरमरा जाएगी।”
दोनों जिलों में उठे विरोध और किसानों की नाराजगी ने कांग्रेस सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार बार-बार खाद की उपलब्धता का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। वारणगल के किसान भुक्या हेमला ने सीधे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले किसानों को राहत देने और मुफ्त में खाद-बीज उपलब्ध कराने का वादा किया गया था, लेकिन अब वही किसान सबसे अधिक परेशान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कपास जैसी नकदी फसल के लिए समय पर खाद का उपयोग बेहद जरूरी है। यदि शुरुआती दिनों में यूरिया और अन्य उर्वरक न मिलें तो पूरी फसल प्रभावित होती है। यही वजह है कि वारणगल के किसान ने मजबूरी में पूरी फसल उखाड़ फेंकी। खम्मम के प्रदर्शनकारियों का भी कहना है कि फसल के इस महत्वपूर्ण चरण में यूरिया की कमी से हजारों किसान प्रभावित हो रहे हैं। यदि यह संकट तुरंत नहीं सुलझा तो इसका असर सीधा उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा।
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