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Telangana तेलंगाना: High Court ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को कर्मचारी सेवा और कल्याण से संबंधित मामलों में कोई टालमटोल वाली रवैया नहीं अपनाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश Aparesh Kumar Singh और न्यायाधीश G.M. Mohiuddin की खंडपीठ ने कहा कि एक नियोक्ता के रूप में सरकार को जिम्मेदार और निष्पक्ष ढंग से कार्य करना चाहिए, और यह चिंता का विषय है कि लंबित न्यायिक निर्देश अब तक लागू नहीं किए गए हैं। यह टिप्पणियाँ उस समय आईं जब खंडपीठ ने दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों M Vijaya Lakshmi और T Hemavathi द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई की। इन याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि वर्ष 2012 में तत्कालीन Andhra Pradesh Administrative Tribunal (APAT) द्वारा दिए गए आदेशों—जिनमें अस्थायी सेवा को नियमितीकरण, पेंशन और अन्य लाभों के लिए गिना जाने का निर्देश था—को उनकी परिस्थितियों में लागू नहीं किया गया।
APAT के आदेशों को बाद में Telangana High Court और Supreme Court ने भी बरकरार रखा था। खंडपीठ ने इस बात पर खेद जताया कि सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बावजूद आदेशों का पालन नहीं किया गया, जिससे कई नई कानूनी कार्रवाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं। “यह चिंता का विषय है कि मुद्दा Supreme Court में अंतिम रूप से निपट जाने के बावजूद सरकार निर्देशों का पालन करने में विफल रही है,” खंडपीठ ने कहा। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला पूर्व में अविभाजित Andhra Pradesh के दौरान उत्पन्न हुआ था, इसलिए वर्तमान Andhra Pradesh सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
हालांकि, चूंकि याचिकाकर्ताओं ने अपनी सेवा Telangana क्षेत्र में प्रदान की थी, इसलिए 2012 के Tribunal आदेशों को उनके मामलों में लागू करना आवश्यक है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और सुनवाई को 21 नवंबर तक स्थगित कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है कि कर्मचारियों के अधिकारों और कल्याण संबंधी लंबित मुद्दों को जल्द से जल्द हल करना अनिवार्य है। इस फैसले से यह भी स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सतर्क है और सरकार को निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करने के लिए प्रेरित कर रही है।
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