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Hyderabad हैदराबाद: तेलंगाना में TGSRTC कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बस सेवाएं प्रभावित हैं, लेकिन इसके बावजूद हैदराबाद में मेट्रो और MMTS उपनगरीय रेल नेटवर्क में यात्रियों की संख्या में अपेक्षाकृत सीमित वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं ने इस दौरान सर्ज प्राइसिंग लागू कर दी है, जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
हड़ताल के कारण सड़कों पर बसें नहीं चलने से उम्मीद की जा रही थी कि सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों पर दबाव बढ़ेगा, लेकिन हैदराबाद मेट्रो और MMTS में अपेक्षित बड़ी वृद्धि नहीं देखी गई।
MMTS हैदराबाद के सिकंदराबाद और हैदराबाद डिवीजन ने 22 अप्रैल को कुल 6,365 अतिरिक्त यात्रियों की रिपोर्ट दर्ज की। इसके साथ कुल यात्रियों की संख्या 42,470 तक पहुंच गई, जो लगभग 10.1 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी अवधि में MMTS की आय ₹2.2 लाख से बढ़कर ₹2.55 लाख हो गई, जो 15.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है।
दूसरी ओर, हैदराबाद मेट्रो रेल में भी यात्रियों की संख्या में केवल मामूली वृद्धि देखी गई। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, हड़ताल के पहले दिन लगभग 10,000 अतिरिक्त यात्री जुड़े। दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर लगभग 40,000 तक पहुंची। सामान्य दिनों में मेट्रो में प्रतिदिन लगभग चार लाख यात्री यात्रा करते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि बस सेवाओं के बाधित होने के बावजूद मेट्रो और MMTS में अपेक्षित स्तर की भीड़ नहीं बढ़ी, क्योंकि कई यात्रियों ने वैकल्पिक निजी परिवहन साधनों का उपयोग किया।
इस बीच, बाइक टैक्सी, कैब और ऑटोरिक्शा जैसी ऐप-आधारित सेवाओं ने हड़ताल का फायदा उठाते हुए सर्ज प्राइसिंग लागू कर दी है। इससे यात्रा लागत में वृद्धि हुई है, जिससे दैनिक यात्रियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
यात्रियों का कहना है कि बस सेवाओं के बंद होने से विकल्प सीमित हो गए हैं, और निजी ऐप आधारित सेवाओं की बढ़ी हुई कीमतों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की हड़तालों के दौरान सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क पर असंतुलित प्रभाव पड़ता है, जहां कुछ माध्यमों पर भीड़ बढ़ती है, जबकि कुछ अपेक्षित रूप से प्रभावित नहीं होते।
प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यात्री सुविधाओं को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही, लोगों से वैकल्पिक परिवहन साधनों का समझदारी से उपयोग करने की अपील की गई है।
कुल मिलाकर, TGSRTC हड़ताल का असर शहर के परिवहन ढांचे पर दिखाई दे रहा है, लेकिन मेट्रो और MMTS में सीमित वृद्धि और निजी सेवाओं में बढ़ती लागत ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
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