
तेलंगाना के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने सोमवार को तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के कर्मचारियों से हड़ताल पर न जाने की अपील की, क्योंकि इससे लोगों को असुविधा होगी। टीजीएसआरटीसी कर्मचारी यूनियनों के नेताओं ने मंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। मंत्री ने कहा कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कर्मचारियों से 6 मई से हड़ताल पर जाने का फैसला वापस लेने का आग्रह किया। पोन्नम प्रभाकर ने यूनियनों से कहा कि वह और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी हमेशा उनकी शिकायतें सुनने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आरटीसी की सुरक्षा, कर्मचारियों के कल्याण और यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है। मंत्री ने यूनियनों से हड़ताल पर न जाने का आग्रह किया, क्योंकि आरटीसी अभी घाटे से उबरना शुरू ही किया है और समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने यूनियन नेताओं से यह भी कहा कि पिछली बीआरएस सरकार ने 10 साल तक आरटीसी की उपेक्षा की। इसने न तो एक भी नई बस खरीदी और न ही किसी को नौकरी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली के.सी. राव के नेतृत्व वाली सरकार ने कर्मचारी सहकारी ऋण समिति (सीसीएस) और भविष्य निधि (पीएफ) का इस्तेमाल किया।
पोन्नम प्रभाकर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद, उसने आरटीसी कर्मचारियों को जारी किए गए बांड के लिए 400 करोड़ रुपये का भुगतान किया और लंबे समय से लंबित पीएफ बकाया को चुकाने के लिए 1,039 करोड़ रुपये का भुगतान किया और सीसीएस बकाया के लिए 345 करोड़ रुपये दिए।
परिवहन मंत्री ने उल्लेख किया कि अनुकंपा के आधार पर 1,500 नियुक्तियां की गईं जबकि 3,038 नई नौकरियों को मंजूरी दी गई।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी पिछले सप्ताह टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों से हड़ताल पर न जाने की अपील की थी।
यह कहते हुए कि टीजीएसआरटीसी ने अभी-अभी मुनाफा कमाना शुरू किया है, उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि यह उनका संगठन है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है।
टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई समिति ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वे 6 मई की मध्यरात्रि से हड़ताल पर जाएंगे।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि संगठन द्वारा अर्जित लाभ उनके हाथों में रखा जाएगा और उन्हें सुझाव देना चाहिए कि वे इस पैसे को कैसे खर्च करें।
मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है और उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और सरकार के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।





