
भद्राचलम के श्री सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर में हरिदास गायकों द्वारा भक्ति गीत गाने की सदियों पुरानी परंपरा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में एक सीनियर कलाकार के निधन के बाद हरिदास के तीनों पद खाली पड़े हैं।
मंदिर की रोज़ाना की पूजा-अर्चना के दौरान भक्ति गीत गाने वाले उप्पुल्लुरी सूर्य आनंद प्रकाश राव के निधन के बाद अब मंदिर में कोई हरिदास नहीं बचा है। मंदिर के सूत्रों ने बताया कि हरिदास के तीनों स्वीकृत पद खाली हैं, जिससे पारंपरिक संगीत सेवा के जारी रहने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भक्तों और विरासत में रुचि रखने वाले लोगों ने चिंता जताई है कि समय पर भर्ती और उत्तराधिकार की योजना न होने के कारण हरिदास परंपरा पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में कई सीनियर हरिदास कलाकारों का निधन हो गया है, जबकि नई पीढ़ी इस परंपरा से नहीं जुड़ी है।
हालांकि, खबरों के अनुसार हाल ही में हरिदास का एक पद भरने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ़ एक उम्मीदवार के आवेदन करने के कारण भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
भक्तों ने बंदोबस्ती विभाग (Endowments Department) और मंदिर प्रशासन से अपील की है कि वे खाली पदों को भरकर और प्रशिक्षित भक्ति गायकों - जिनमें ऑल इंडिया रेडियो के ग्रेड-I कलाकार या हरिदास परंपरा के जानकार शामिल हैं - को प्रोत्साहित करके हरिदास परंपरा को फिर से जीवित करने के लिए तुरंत कदम उठाएं, ताकि मंदिर की अनूठी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को बचाया जा सके।
पीढ़ियों से, हरिदास गायक सुप्रभातम सेवा से लेकर पावलिंपु सेवा तक, रोज़ाना की पूजा-अर्चना के दौरान संत-कवि भक्त रामदास और राजा तुमु लक्ष्मी नरसिम्हा दास की भक्ति रचनाओं का गायन करते आ रहे हैं।
माना जाता है कि यह परंपरा भक्त रामदास के समय की है, जिन्होंने मंदिर की पूजा-पद्धति के हिस्से के तौर पर हरिदास व्यवस्था की शुरुआत की थी।





