
Telangana तेलंगाना: जून का महीना शुरू होते ही जहां एक ओर किसान खरीफ सीजन की शुरुआत के लिए बारिश का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाली कुछ बल्क ड्रग कंपनियों की गतिविधियों को लेकर भी चिंता बढ़ने लगती है। स्थानीय लोगों और किसानों का आरोप है कि बारिश के दौरान कुछ उद्योग हानिकारक औद्योगिक अपशिष्ट को खुले में छोड़ देते हैं, जिससे पर्यावरण और जल स्रोतों पर गंभीर असर पड़ता है।
जानकारी के अनुसार, कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पन्न होने वाला खतरनाक अपशिष्ट ओवरहेड टैंकों के अलावा जमीन के नीचे बने समप्स में जमा किया जाता है। आरोप है कि चूंकि कई उद्योगों ने उचित ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित नहीं किए हैं, इसलिए बारिश शुरू होते ही इस अपशिष्ट को बहाने की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। बारिश के पानी के बहाव के साथ यह कचरा नालियों में पहुंचकर स्थानीय जलधाराओं में मिल जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रदूषित पानी आगे चलकर मंजिरा, गोदावरी, मूसी, कृष्णा सहित कई नदियों तक पहुंचता है, जिससे जल प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो जाती है। किसानों का आरोप है कि इस तरह के रासायनिक अपशिष्ट से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि खेती पर भी दीर्घकालिक असर पड़ता है।
पिछले एक सप्ताह में हुई बारिश के बाद कई नागरिकों और किसान संगठनों ने उद्योगों पर औद्योगिक अपशिष्ट को खुले में छोड़ने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि IDA बोलाराम जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित कई बल्क ड्रग कंपनियों से इस तरह की गतिविधियां सामने आई हैं, जिससे आसपास के इलाकों में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए संबंधित विभागों से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर स्थानीय जल स्रोतों और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
वहीं स्थानीय प्रशासन की ओर से कहा गया है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित औद्योगिक इकाइयों की जांच की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग औद्योगिक प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान इस तरह की समस्याओं को रोका जा सके।





