
मल्काजगिरी पुलिस ने एक कथित अवैध 'एग डोनेशन' (अंडाणु दान) रैकेट की जांच के तहत तीन फर्टिलिटी सेंटरों पर छापेमारी की और वहां से दस्तावेज जब्त किए। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या डोनर के रिकॉर्ड फर्जी तरीके से बनाए गए थे और क्या जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। बेगमपेट और सरूरनगर पुलिस ने भी आगे की पूछताछ के लिए आरोपियों की कस्टडी मांगी है।
मल्काजगिरी पुलिस कमिश्नर बी. सुमति ने बताया कि तीनों सेंटरों से जब्त किए गए दस्तावेजों की बारीकी से जांच और क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या एग डोनर के रिकॉर्ड सही ढंग से रखे गए थे और दी गई जानकारी असली है या नहीं।
जांचकर्ता आधार कार्ड की जानकारी के संभावित दुरुपयोग, अविवाहित महिलाओं को विवाहित बताने, बच्चों के विवरण में बदलाव, जाली हस्ताक्षर, और एक महिला की पहचान का इस्तेमाल करके किसी दूसरी महिला को डोनर के रूप में रजिस्टर करने जैसे मामलों की जांच कर रहे हैं।
सुमति ने बताया, "एग डोनर को अपनी पहचान का सबूत, वैवाहिक स्थिति, बच्चों का विवरण, ब्लड ग्रुप, हेल्थ प्रोफाइल और अपनी सहमति (कंसेंट) देनी होती है। पुलिस यह वेरिफाई कर रही है कि क्या ये दस्तावेज लिए गए थे और क्या इनकी पुष्टि (ऑथेंटिकेशन) की गई थी।"
इस जांच में 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी' (ART) सेंटरों और फर्टिलिटी सेंटरों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जहां ART सेंटर सीधे डोनर के संपर्क में आते हैं, वहीं फर्टिलिटी सेंटर ऐसा नहीं करते। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या हर चरण पर तय सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था।
एग प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए दिए जाने वाले हार्मोनल इंजेक्शन भी जांच के दायरे में हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने हार्मोनल इंजेक्शन जब्त किए और उन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेज दिया।
जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ये इंजेक्शन मेडिकल देखरेख में और तय प्रोटोकॉल के अनुसार दिए गए थे।
सुमति ने कहा कि जांच में बिचौलियों और संबंधित सेंटरों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी सेंटर से जुड़े होने मात्र से कोई व्यक्ति आरोपी नहीं बन जाता; कार्रवाई केवल उन सबूतों के आधार पर की जाएगी जो किसी व्यक्ति की इसमें सीधी संलिप्तता को साबित करते हों।





