
Telangana तेलंगाना: सरकार द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ संकाय सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष करने के प्रस्ताव को लेकर राज्य में विरोध तेज हो गया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ युवा चिकित्सकों और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इस फैसले से उनके करियर की प्रगति और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ेगा।
तेलंगाना सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न मेडिकल संगठनों ने शनिवार को खुलकर नाराजगी जताई। वरिष्ठ रेजिडेंट्स और पीजी मेडिकल छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने कहा कि इस तरह का निर्णय चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में असंतुलन पैदा कर सकता है और युवाओं के लिए अवसरों को सीमित कर देगा।
तेलंगाना सीनियर रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस संबंध में सरकारी आदेश (GO) जारी करती है, तो राज्यभर में अनिश्चितकालीन विरोध शुरू किया जा सकता है। संगठन के अनुसार, इस फैसले से राज्य में 1,500 से अधिक वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर प्रभावित होंगे।
डॉक्टरों का कहना है कि सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से न केवल नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि पहले से कार्यरत युवा डॉक्टरों की पदोन्नति भी देर से होगी। इससे योग्य विशेषज्ञों के लिए अवसर सीमित हो जाएंगे और चिकित्सा संस्थानों में नई प्रतिभा के प्रवेश में बाधा उत्पन्न होगी।
युवा चिकित्सकों का यह भी कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही स्टाफ की संरचना संतुलित करने की आवश्यकता है, ऐसे में वरिष्ठ संकाय की सेवा अवधि बढ़ाने से व्यवस्था और अधिक जटिल हो सकती है। उनका मानना है कि इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशिक्षण प्रणाली पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
विरोध कर रहे डॉक्टरों ने यह भी कहा कि यदि वरिष्ठ शिक्षक लंबे समय तक पदों पर बने रहते हैं, तो इससे नई भर्ती और प्रशिक्षण के अवसर सीमित हो जाते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे और युवा डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श जारी है और विभिन्न हितधारकों की राय भी ली जा रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर संतुलित नीति की आवश्यकता है, जिससे न तो वरिष्ठ विशेषज्ञों का अनुभव व्यर्थ जाए और न ही युवा डॉक्टरों के अवसर प्रभावित हों।
कुल मिलाकर, यह मामला अब सरकार और मेडिकल समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है, जिसका असर राज्य की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।





