
हैदराबाद: गुरुवार को 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' के मौके पर राष्ट्रपति निलयम और गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज फॉर वूमेन (GDCW), बेगमपेट समेत कई जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मकसद छात्रों और महिलाओं को अपनी भावनाओं को समझने, ज़रूरत पड़ने पर मदद लेने और बिना किसी शर्म या झिझक के मानसिक स्वास्थ्य पर बात करने के लिए प्रोत्साहित करना था।
GDCW, बेगमपेट में, इंग्लिश डिपार्टमेंट, यंगिस्तान फाउंडेशन और यंगिस्तान SDG क्लब ने मिलकर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। फाउंडेशन के फाउंडर और डायरेक्टर अरुण डेनियल, सीनियर काउंसलर प्रीति सैमसन वाई. और काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अरौना स्टीफन ने भावनात्मक परेशानी, बिना किसी पूर्वाग्रह के दूसरों की बात सुनने की अहमियत और ऐसी जगहें बनाने की ज़रूरत पर चर्चा की जहाँ लोग अपनी मुश्किलों के बारे में बात कर सकें। छात्रों ने एक्सपर्ट्स से बातचीत की और आम गलतफहमियों और शर्म-झिझक से हटकर मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की।
राष्ट्रपति निलयम में, स्कूलों, कॉलेजों और ट्रेनिंग संस्थानों के लगभग 1,150 छात्रों के साथ-साथ माता-पिता, महिला संगठनों, डॉक्टरों और छात्र समुदायों ने 'विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस' के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
राष्ट्रपति निलयम की मैनेजर डॉ. के. रजनी प्रिया ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को सिर्फ़ बीमारियों के नज़रिए से नहीं, बल्कि पूरी सेहत के एक ज़रूरी हिस्से के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सेशन का मकसद छात्रों को ऐसी प्रैक्टिकल जानकारी देना था जो उनकी पढ़ाई और निजी ज़िंदगी में काम आ सके। साथ ही, उन्होंने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रैक्टिसिंग साइकियाट्रिस्ट डॉ. फणी भूषण द्रोणमराजू ने किशोरावस्था में होने वाले बदलावों, साथियों के दबाव (पीयर प्रेशर) और आत्म-सम्मान के बारे में बात की और छात्रों को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार पर सोचने के लिए प्रोत्साहित किया। मोटिवेशनल स्पीकर रंजीत दसारी ने स्टेज पर होने वाले डर, झिझक और खुद पर शक करने की समस्या पर बात की और समय के सही इस्तेमाल (टाइम मैनेजमेंट) और आदतें व नज़रिया बनाने में विचारों की भूमिका पर ज़ोर दिया।
एडवोकेट डॉ. डी. श्रीदेवी ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कानूनी अधिकारों और ज़िम्मेदारियों के बारे में बताया, जिसमें 'मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017' के प्रावधान भी शामिल थे। उन्होंने इलाज की सुविधा, गोपनीयता और सम्मान पर खास ज़ोर दिया। रोशनी ट्रस्ट के साइकोलॉजिस्ट डॉ. पी. अंजन कुमार ने ध्यान लगाने (कॉन्सेंट्रेशन) और मोबाइल फ़ोन के ज़्यादा इस्तेमाल के बारे में बात की। उन्होंने पढ़ाई के लिए व्यवस्थित तरीके अपनाने का सुझाव दिया, जैसे कि ध्यान लगाकर पढ़ाई करना और उसके बाद रिवीजन और छोटे-छोटे ब्रेक लेना।





