
स्टेट TB सेल के IEC ऑफिसर जितेंद्र और WHO कंसल्टेंट डॉ. घाना ने TB और ड्रग-रेसिस्टेंट TB (DR-TB) पर सेशन आयोजित किए। उन्होंने TB के लक्षणों और इसके फैलने के तरीकों, समय पर जांच के महत्व और जल्द से जल्द इलाज शुरू करने की ज़रूरत के बारे में बताया।
यह बातचीत, जिसका नाम ‘TB संवाद – मीडिया के साथ TB पर बातचीत’ था, TB अलर्ट इंडिया द्वारा CAP-DRTB प्रोजेक्ट के तहत आयोजित की गई थी। इस प्रोग्राम में लगभग 30 मीडिया प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने पत्रकारों से अपील की कि वे TB के बारे में सही, ज़िम्मेदार और संवेदनशील तरीके से रिपोर्टिंग करें, ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न करें जिनसे बीमारी से प्रभावित लोगों को शर्मिंदगी महसूस हो, और उनकी प्राइवेसी का ध्यान रखें।
उन्होंने सरकारी हेल्थ सेंटरों पर उपलब्ध मुफ़्त TB जांच और इलाज की सुविधाओं के बारे में जागरूकता फैलाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
इन सेशन में TB के ड्रग-रेसिस्टेंट रूपों, जैसे मल्टी-ड्रग-रेसिस्टेंट TB (MDR-TB) और एक्सटेंसिवली ड्रग-रेसिस्टेंट TB (XDR-TB) पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को शुरुआती दौर में बीमारी का पता लगाने, डॉक्टरों की सलाह के अनुसार नियमित रूप से दवा लेने और इलाज का पूरा कोर्स पूरा करने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
प्रोग्राम में शामिल पांच TB चैंपियंस ने इलाज के दौरान अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने उन चुनौतियों के बारे में बताया जिनका उन्होंने सामना किया, अपने परिवारों और समुदायों से मिले सहयोग और इलाज पूरा करने व TB से ठीक होने के अपने अनुभवों के बारे में बात की।
प्रतिभागियों ने मानवीय नज़रिए से TB और DR-TB की रिपोर्टिंग करने और ऐसी समस्याओं की पहचान करने पर भी चर्चा की जिन्हें न्यूज़ स्टोरी के तौर पर विकसित किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि ठीक होने की कहानियों से यह संदेश देने में भी मदद मिल सकती है कि जब मरीज़ तय इलाज पूरा करते हैं, तो TB का इलाज संभव है।





