
हैदराबाद: तेलंगाना राजस्व विभाग मौजूदा भूमि सर्वेक्षण नंबरों को अगले 15 से 20 वर्षों तक जारी रखेगा। ऐसा तब तक किया जाएगा जब तक कि अदालती मामले, बंधक (मॉर्गेज) से जुड़े मुद्दे, पारिवारिक विवाद और कृषि भूमि पर लिए गए बैंक लोन से जुड़े मामले पूरी तरह सुलझ नहीं जाते।
शनिवार को सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में 'द हंस इंडिया' से बातचीत करते हुए, राजस्व सचिव और भूमि प्रशासन के मुख्य आयुक्त (CCLA) डीएस लोकेश कुमार ने बताया कि विभाग हर भूमि के टुकड़े (लैंड पार्सल) के लिए 'लैंड पार्सल मैप' (LPM) नंबर लाएगा। साथ ही, मौजूदा सर्वेक्षण नंबरों को भी इस नई पहचान प्रणाली के साथ जोड़कर बरकरार रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी किसानों को 'भूधर' (Bhudhar) नंबर भी दिए जाएंगे। ये नंबर राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किए जाएंगे, जिससे भूमि के हर टुकड़े के लिए एक मानक पहचान प्रणाली मिल सकेगी। लोकेश कुमार ने बताया कि राज्य भर में चल रहे पुनर्सर्वेक्षण (री-सर्वे) का पहला चरण 2,240 गांवों में से 400 गांवों में पूरा हो चुका है। पहले चरण के तहत बाकी गांवों में भी पुनर्सर्वेक्षण का काम तेजी से चल रहा है और जल्द ही पूरा हो जाएगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि पूरे राज्य में पुनर्सर्वेक्षण की प्रक्रिया डेढ़ साल के भीतर पूरी कर ली जाएगी। गौरतलब है कि पहले चरण के तहत, राजस्व विभाग हैदराबाद को छोड़कर हर जिले के 70 गांवों में पुनर्सर्वेक्षण कर रहा है। जिन गांवों में पुनर्सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, वहां के किसानों की स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी जमीन बेच सकते हैं, भले ही उन्हें अभी तक अपनी नई पासबुक न मिली हो। प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, CCLA ने कहा कि राजस्व विभाग एक व्यवस्थित तरीके से पुनर्सर्वेक्षण कर रहा है। इसकी शुरुआत गांव की सीमाओं (ग्रामकंटम), सरकारी जमीनों (जैसे पोरामबोकु, बंजर भूमि आदि), सिंचाई वाली जमीनों, बंदोबस्त संपत्तियों, स्कूलों, कॉलेजों और कब्रिस्तान जैसी जगहों से की जा रही है। किसानों की निजी कृषि भूमि का सर्वेक्षण इसके बाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग निजी कृषि संपत्तियों से पहले सार्वजनिक और सरकारी जमीनों को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि सभी तरह की जमीनों की सही पहचान और दस्तावेजीकरण सुनिश्चित हो सके।
लोकेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि जो किसान अपनी निजी जमीन का सर्वेक्षण करवाना चाहते हैं, उन्हें तब तक इंतजार करना होगा जब तक सरकार उनके गांव में पुनर्सर्वेक्षण शुरू नहीं कर देती। ऐसा इसलिए है क्योंकि सर्वे करने वाले कर्मचारी अभी पूरे राज्य में चल रहे इस बड़े सर्वेक्षण कार्य में व्यस्त हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित LPM और भूधर पहचान प्रणालियों के साथ-साथ मौजूदा सर्वे नंबरों को भी जारी रखने का उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी जटिलताओं और अन्य विवादों से बचना है।





