तेलंगाना

तेलंगाना हाईकोर्ट का मार्गदर्शी मामले में फैसला

Kiran
6 Nov 2026 8:27 AM IST
तेलंगाना हाईकोर्ट का मार्गदर्शी मामले में फैसला
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हैदराबाद: तेलंगाना उच्च न्यायालय ने 'मार्गादर्शी चिट फंड प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में 2005 से 2015 के बीच एक निजी बिजली उत्पादक कंपनी से ली गई बिजली पर 'क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज' (CSS) के रूप में 81.12 लाख रुपये की मांग को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति नागेश भीमपाका ने कहा कि 1997 और 1998 में जारी किए गए सरकारी आदेश, जो गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादकों को तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को बिजली बेचने की अनुमति देते थे, उन्हें 'बिजली (आपूर्ति) अधिनियम, 1948' की धारा 43-A(1)(c) के तहत राज्य सरकार की सहमति नहीं माना जा सकता।
इस सहमति के आधार पर CSS से छूट का दावा नहीं किया जा सकता। मार्गादर्शी ने 'सदर्न पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ऑफ तेलंगाना लिमिटेड' द्वारा 31 जनवरी 2025 को जारी किए गए एक डिमांड नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें वित्तीय वर्ष 2005-06 से 2014-15 के लिए CSS के रूप में 81,12,110 रुपये की मांग की गई थी। बाद में, 18 जून 2025 को एक विस्तृत आदेश (स्पीकिंग ऑर्डर) के जरिए इस मांग को बरकरार रखा गया।
मार्गादर्शी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के. गोपाल चौधरी ने तर्क दिया कि कंपनी ने 'सुधा एग्रो एंड केमिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड' से बिजली खरीदी थी, जिसे पुराने नियामक ढांचे के तहत तीसरे पक्ष को बिजली बेचने के लिए अधिकृत किया गया था। उन्होंने दलील दी कि 'बिजली (कठिनाइयों को दूर करने संबंधी) दूसरा आदेश, 2005' ऐसे उपभोक्ताओं को CSS के भुगतान से छूट देता है। हालांकि, वितरण कंपनी ने तर्क दिया कि जिन सरकारी आदेशों का हवाला मार्गादर्शी ने दिया है, वे केवल गैर-पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रोत्साहन देते हैं, न कि 1948 के अधिनियम की धारा 43-A(1)(c) के तहत कोई सहमति प्रदान करते हैं।
प्रतिवादियों के तर्क को स्वीकार करते हुए, अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि उसके बिजली उत्पादक के पास उक्त प्रावधान के तहत आवश्यक विशिष्ट सहमति मौजूद थी। अदालत ने यह भी गौर किया कि मार्गादर्शी न तो अधिकारियों के समक्ष और न ही उच्च न्यायालय के समक्ष ऐसी कोई सहमति पेश कर पाया। इसके चलते, अदालत ने रिट याचिका को खारिज कर दिया।
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