
हैदराबाद: डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमिटी (DSC) भर्ती को लेकर 17 साल से चल रहे विवाद के बाद, तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें सेकेंडरी ग्रेड टीचर (SGT) के 30 प्रतिशत पदों को डिप्लोमा इन एजुकेशन (DEd) योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित करने को चुनौती दी गई थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पी. सैम कोशी और न्यायमूर्ति सुड्डाला चलापति राव की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि SGT के 30 प्रतिशत पदों को DEd योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित करने का सरकार का निर्णय, चयन प्रक्रिया के बीच में भर्ती नियमों में किया गया कोई अनुचित बदलाव नहीं है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके पास BEd की योग्यता है। सरकार ने 06.12.2008 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें स्कूल असिस्टेंट, सेकेंडरी ग्रेड टीचर, भाषा पंडित और शारीरिक शिक्षा शिक्षक जैसे विभिन्न पदों के लिए कुल 52,655 रिक्तियां निकाली गई थीं (उस समय अविभाजित राज्य के लिए)। चयन प्रक्रिया के दौरान ही, अधिकारियों ने 29 जनवरी 2009 को GO 28 के माध्यम से अधिसूचना में संशोधन किया। इसमें कहा गया कि SGT के 30 प्रतिशत पद विशेष रूप से DEd योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगे। बाकी 70 प्रतिशत पदों के लिए BEd और DEd दोनों तरह के उम्मीदवार पात्र होंगे, जिनका चयन DSC में उनकी कॉमन मेरिट के आधार पर किया जाएगा (यह भर्ती के अन्य लागू नियमों के अधीन होगा)।
ये याचिकाएं 2009 में BEd योग्यता वाले उम्मीदवारों द्वारा दायर की गई थीं। उन्होंने GO 28 के माध्यम से किए गए इस संशोधन को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि सरकार ने 6 दिसंबर 2008 को मूल अधिसूचना जारी करने के बाद भर्ती नियमों में बदलाव कर दिया है।
इन तर्कों को खारिज करते हुए, हाई कोर्ट ने इस मामले को उन अन्य मामलों से अलग माना, जिनमें परीक्षा या मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन मानदंड बदल दिए गए थे। कोर्ट ने कहा कि यह संशोधन हॉल टिकट जारी होने और लिखित परीक्षा से पहले ही कर दिया गया था। साथ ही, उम्मीदवारों को संशोधित नियमों को देखते हुए आवेदन करने या अपनी भागीदारी पर पुनर्विचार करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया था।





