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हैदराबाद: तेलंगाना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को बीआरएस नेता और सिद्धिपेट विधायक टी. हरिश राव के खिलाफ दर्ज मामले में यदागिरिगुट्टा पुलिस से स्पष्टीकरण पेश करने को कहा। अदालत ने मंदिर के कार्यकारी अधिकारी (EO) को भी नोटिस जारी किया है।मामला अगस्त 2024 में यदाद्री लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर में हरिश राव द्वारा किए गए एक अनुष्ठान से संबंधित है। विधायक ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि किसानों से किए गए ऋण माफी के वादे को अगस्त 15 तक पूरा नहीं किया गया, जिससे किसानों के हितों के साथ धोखा हुआ। इस आलोचना के बीच हरिश राव ने मंदिर परिसर में अपने साथ लाए गए निजी पुरोहितों के माध्यम से पाप परिहार पूजा (atonement rituals) संपन्न की।
इस घटना के बाद मामला स्थानीय पुलिस में दर्ज किया गया। उच्च न्यायालय ने पुलिस को मामले में कार्रवाई और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या किसी प्रकार की अनुचित गतिविधि हुई और किस हद तक कानून का पालन किया गया। मंदिर के EO को नोटिस जारी करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर प्रशासन ने किसी भी प्रक्रिया में अनियमितता नहीं की। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मामले की जांच निष्पक्ष और विस्तृत होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक और धार्मिक संवेदनाओं दोनों से जुड़ा हुआ है, और इसे लेकर समाज में विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। बीआरएस और विपक्ष दोनों ही इस मामले में अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। उच्च न्यायालय की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी राजनीतिक या धार्मिक हस्तक्षेप को देखते हुए जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।
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