
हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और नागरिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे हैदराबाद और सिकंदराबाद में कबूतरों को दाना खिलाने को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए एक हलफनामा दाखिल करें। यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कबूतरों को बेरोकटोक दाना खिलाना सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
चीफ जस्टिस अपारेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग, पशुपालन विभाग, शहर के पुलिस कमिश्नर और GHMC सहित राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जुड़वां शहरों के विभिन्न हिस्सों में कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगाने के लिए उठाए गए ठोस कदमों का विवरण रिकॉर्ड पर रखें। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2026 को होगी।
यह जनहित याचिका हैदराबाद के मुशीराबाद निवासी डॉ. राधेश्याम तापड़िया ने दायर की थी। उनका तर्क है कि आवासीय कॉलोनियों, अस्पतालों, सार्वजनिक स्थानों और ऐतिहासिक इमारतों में कबूतरों को बेरोकटोक दाना खिलाने से स्वच्छता, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा हुई हैं।
याचिकाकर्ता के वकील दीपक मिश्रा और मयूर मुंद्रा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने 7 जनवरी, 2026 के हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए GHMC कमिश्नर, स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण विभाग, सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय और पशुपालन विभाग को एक विस्तृत प्रतिवेदन (representation) सौंपा था। हालांकि, प्रतिवेदन सौंपने के बावजूद, अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
वकीलों ने तर्क दिया कि राज्य सरकार और GHMC, कबूतरों को दाना खिलाने को नियंत्रित करने और कबूतरों की आबादी में बेतहाशा वृद्धि से उत्पन्न स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों को रोकने के लिए GHMC अधिनियम की धारा 115(20) के तहत अपनी वैधानिक शक्तियों का उपयोग करने में विफल रहे हैं। याचिका में महामारी रोग अधिनियम, 1897 की धारा 2 का भी हवाला दिया गया है और तर्क दिया गया है कि नियामक उपायों के अभाव में सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा है।
याचिकाकर्ता ने नगर निगम अधिकारियों को यह निर्देश देने की भी मांग की है कि वे कबूतरों की बीट से प्रभावित सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई करें, अनधिकृत रूप से कबूतरों को दाना खिलाने वाले लोगों पर जुर्माना लगाएं और 'वीरेंद्र गौर बनाम हरियाणा राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित पर्यावरण संरक्षण सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित करें।





