
हैदराबाद: तेलंगाना हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज जस्टिस अभिनंदन कुमार शविलि और उनके भाई अशोक कुमार शविलि को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने रंगारेड्डी ज़िला कलेक्टर की उस कार्रवाई पर रोक लगा दी है, जिसके तहत उनकी ज़मीनों को रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 की धारा 22-A के तहत 'निषिद्ध संपत्तियों' (prohibited properties) की सूची में डाल दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने कलेक्टर की 'फॉर्म-I' कार्रवाई को चुनौती दी। उनका तर्क था कि उनकी ज़मीनों को निषिद्ध सूची में शामिल करना मनमाना और असंवैधानिक था, साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 300A और रजिस्ट्रेशन एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन भी था।
याचिका के अनुसार, तेलंगाना हाई कोर्ट के पूर्व जज के पास शमशाबाद मंडल के गुब्बाडी गाँव में सर्वे नंबर 103/45 AA में 3 एकड़ और 26 गुंटा ज़मीन है, और उनके भाई के पास सर्वे नंबर 103/45 E में 1 एकड़ और 4 गुंटा ज़मीन है। उन्होंने अपनी संपत्तियों के मामले में इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग की।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि ये ज़मीनें उनके विक्रेताओं को 1952 से पहले आवंटित की गई थीं और इनके हस्तांतरण (बेचने या ट्रांसफर करने) पर कोई रोक नहीं थी। बाद में याचिकाकर्ताओं ने 1986 और 1989 में रजिस्टर्ड सेल डीड (बिक्री विलेख) के ज़रिए ये संपत्तियाँ खरीदीं। इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने ज़मीनें उनके नाम पर म्यूटेट (दर्ज) कीं और पट्टादार पासबुक जारी कीं।





