
तेलंगाना हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस सेंटरों से जुड़ी एक PIL (जनहित याचिका) को बंद कर दिया है। कोर्ट ने मरीज़ों की सुरक्षा और इलाज की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष जताया।
चीफ़ जस्टिस अपारेश कुमार सिंह और जस्टिस जीएम मोहिउद्दीन की बेंच को एडिशनल एडवोकेट जनरल टेरा रजनीकांत रेड्डी ने बताया कि सरकार ने सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस सेंटरों को बेहतर बनाया है। उन्होंने कहा कि लगभग 11 लाख डायलिसिस प्रक्रियाएं की जा चुकी हैं और इलाज 'आरोग्यश्री' योजना के तहत कवर किया गया है।
यह PIL वकील रापोलू भास्कर के एक पत्र से शुरू हुई थी, जिसे 'स्वतः संज्ञान' (suo motu) लेते हुए याचिका माना गया था। इसमें सरकारी अस्पतालों में PPP मॉडल के तहत चल रहे 102 डायलिसिस सेंटरों में कथित कमियों की जांच की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर्स को प्रति सेशन 1,950 रुपये का भुगतान कर रही है और मरीज़ों में होने वाली दिक्कतों और मौतों पर चिंता जताई थी। सुरक्षा मानकों का पालन किए जाने को देखते हुए कोर्ट ने PIL का निपटारा कर दिया।





