तेलंगाना

तेलंगाना सरकार निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बना रही योजना, जिले के हिसाब से तैयार होगा फसल पैटर्न

Gulabi
29 Dec 2021 4:06 PM GMT
तेलंगाना सरकार निर्यात और किसानों की आय बढ़ाने के लिए बना रही योजना, जिले के हिसाब से तैयार होगा फसल पैटर्न
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इसके लिए वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की टीम से सुझाव भी मांगा गया है
किसानों की आय को बढ़ाने और सरप्लस पैदावार के निर्यात में मदद करने के लिए तेलंगाना सरकार बड़े स्तर पर फसल विविधीकरण कार्यक्रम शुरू करने पर विचार कर रही है. किसानों के हित में जिले के हिसाब से फसल पैटर्न भी तैयार किया जाएगा, ताकि किसान आसानी से अपने जिले के हिसाब से फसल का चयन कर सकें. इसके लिए वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की टीम से सुझाव भी मांगा गया है.
तेलंगाना स्टेट प्लानिंग बोर्ड के उपाध्यक्ष बी विनोद कुमार ने कहा कि जिले के हिसाब से फसल विविधीकरण की योजना तैयार करने से किसानों को सबसे अधिक लाभ होगा. उन्होंने एक ही फसल के अधिक उत्पादन से भाव गिर जाने के कारण होने वाली परेशानियों से भी किसान फसल विविधीकरण से बच जाएंगे. हमारी कोशिश होगी कि किसानों को वैसी फसलों की खेती के लिए बढ़ावा दिया जाए, जिसकी बाजार में मांग हो.
अत्यधिक उत्पादन की मार झेल रहे किसान
तेलंगाना स्टेट प्लानिंग बोर्ड, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस और कॉन्फेडरेशन ऑफ एनजीओ ऑफ रूरल इंडिया (सीएनआरआई) के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस के निदेशक प्रोफेसर देवी प्रसाद ने कहा कि राज्य के किसानों के लिए एक रेग्युलेटेड फार्मिंग सिस्टम की जरूरत है.
इस कार्यक्रम का आयोजन ऐसे समय में किया गया है जब राज्य के किसानों को सरप्लस उत्पादन की मार झेलनी पड़ रही है. बीते 7 साल में तेलंगाना में अनाज उत्पादन तीन गुना तक बढ़ गया है. उत्पादन बढ़ना किसानों के लिए अच्छा न होकर बुरा हो गया है और अब उचित दाम पर बेचने को लेकर चिंता हो गई है.
स्थिति तब और बिगड़ गई जब केंद्र सरकार की तरफ से रबी सीजन के धान की खरीद से इनकार कर दिया गया. दूसरी तरफ, केरल और तमिलनाडु ने भी तेलंगाना से धान खरीदना बंद कर दिया है. इस बार रबी सीजन से पहले ही राज्य सरकार ने किसानों से धान की जगह वैकल्पिक फसलों की खेती करने की सलाह दी थी.
सीएनआरआई के महासचिव बिनोद आनंद ने कहा कि फसल विविधीकरण आज के समय में काफी अहम है. किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार होने के साथ ही यह भूमि की उर्वरक क्षमता में भी बढ़ोतरी करता है. इस समय में तेलंगाना के किसान जिस परेशानी का सामना कर रहे हैं, उसके लिए फसल विविधीकरण सबसे बेहतर विकल्प है.
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