
HYDERABAD हैदराबाद: तेलंगाना सरकार ने रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में Hybrid Annuity Model (HAM) लागू करने का फैसला किया है, हालांकि इससे पहले ठेकेदारों और बिल्डर्स ने इसके विरोध में कई बार आपत्ति जताई थी। इस मामले में जून में बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी को पत्र लिखकर HAM पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। एसोसिएशन ने कहा था कि HAM मॉडल तेलंगाना में व्यावहारिक नहीं है और इसके कारण ठेकेदारों और मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि HAM मॉडल रोड विकास के लिए जरूरी है और इससे लंबी अवधि में फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता बेहतर होगी। इस मॉडल के तहत सरकार और निजी कंपनियां मिलकर सड़क निर्माण में निवेश करती हैं, जिसमें भुगतान का एक हिस्सा निर्माण पूरा होने पर और बाकी हिस्सा सड़क संचालन और रखरखाव के दौरान दिया जाता है।
ठेकेदारों का तर्क है कि HAM में जोखिम अधिक है और भुगतान में देरी होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, मजदूरों और छोटे ठेकेदारों के लिए यह वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है। बावजूद इसके, राज्य सरकार ने कहा है कि परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए HAM जरूरी है और इसका पालन जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, HAM मॉडल देश के अन्य राज्यों में सफल रहा है, लेकिन राज्य की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इसके क्रियान्वयन में सतर्कता जरूरी है। सरकार ने ठेकेदारों और श्रमिकों को आश्वस्त किया है कि उनके हितों का ध्यान रखा जाएगा और परियोजनाओं के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार के इस कदम से तेलंगाना में सड़क निर्माण परियोजनाओं की गति बढ़ने की संभावना है। HAM मॉडल के तहत सार्वजनिक और निजी साझेदारी से नई सड़कों का निर्माण और मौजूदा मार्गों के सुधार में तेजी आएगी, जिससे लॉजिस्टिक्स और यात्रा समय में सुधार होगा।





