
x
प्राइवेट कंपनी को दी गई जमीन की लीज तेलंगाना सरकार ने की रद्द
Hyderabad: तेलंगाना सरकार ने उर्दू अकादमी की जमीन को एक निजी कंपनी को 30 साल की लीज पर देने के अपने फैसले को वापस ले लिया है। सरकार ने विवादों और विरोध के बाद यह कदम उठाया। यह जमीन रंगारेड्डी जिले के सेरिलिंगमपल्ली इलाके में स्थित थी, जिसे निजी कंपनी को उर्दू घर-कम-शादीखाना और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए देने का फैसला किया गया था।
मामला तब विवादों में आया जब तेलंगाना सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने उर्दू अकादमी की करीब 1.04 एकड़ जमीन को हैदराबाद की कंपनी एनएन इंफ्रा एंड कंस्ट्रक्शंस को 30 वर्षों के लिए लीज पर देने का आदेश जारी किया था। यह लीज बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) मॉडल पर आधारित थी।
इस फैसले के बाद विपक्षी दलों और कई संगठनों ने सवाल उठाए थे। एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि जमीन लीज देने की प्रक्रिया में जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने सरकार से इस आदेश को रद्द करने की मांग की थी।
विरोध के बाद सरकार का फैसला
विवाद बढ़ने के बाद तेलंगाना सरकार ने अपना पिछला आदेश वापस ले लिया। सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत नया आदेश जारी कर पहले जारी किए गए GO नंबर 20 को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उर्दू अकादमी के अधिकारियों को आगे की आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहले जारी आदेश के अनुसार, निजी कंपनी को जमीन पर उर्दू घर-कम-शादीखाना और व्यावसायिक परिसर बनाने की अनुमति दी गई थी। हालांकि जमीन का मालिकाना हक उर्दू अकादमी के पास ही रहने की बात कही गई थी।
लीज को लेकर उठे थे सवाल
लीज को लेकर सबसे बड़ा विवाद प्रक्रिया और मंजूरी को लेकर था। आलोचकों का कहना था कि इतनी महत्वपूर्ण सरकारी जमीन को निजी कंपनी को देने से पहले पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक सूचना जारी करने और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया जैसी औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया।
वहीं सरकार के फैसले के बाद अब यह मामला शांत होने की उम्मीद है। उर्दू अकादमी की जमीन को लेकर उठे विवाद ने राज्य में सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी थी।
राजनीतिक रूप से भी गरमाया था मामला
इस मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ सरकार पर विपक्ष ने निशाना साधा था। बीआरएस और अन्य संगठनों ने भी लीज रद्द करने की मांग की थी। विरोध करने वालों का कहना था कि सरकारी संस्थानों की जमीन का इस्तेमाल जनहित के उद्देश्य से होना चाहिए। अब सरकार द्वारा लीज रद्द किए जाने के बाद उर्दू अकादमी की जमीन को लेकर आगे की योजना पर नजर रहेगी। यह भी देखा जाएगा कि भविष्य में इस जमीन का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है।
Next Story





