
हैदराबाद (तेलंगाना): तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष जी. प्रसाद कुमार ने सोमवार को तेलंगाना हेट स्पीच और हेट क्राइम्स (प्रिवेंशन) बिल, 2026 की समीक्षा के लिए 13 सदस्यीय सेलेक्ट कमिटी का गठन किया है। इस कमिटी की अध्यक्षता राज्य के परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर करेंगे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कमिटी को निर्देश दिया है कि वह मानसून सत्र, 2026 के अंतिम दिन या उससे पहले अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करे। कमिटी को बिल के प्रावधानों, सदस्यों की आपत्तियों और सुझावों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी दी गई है।
बिल पर चर्चा के बाद बनी सेलेक्ट कमिटी
तेलंगाना विधानसभा ने 30 मार्च को हेट स्पीच और हेट क्राइम्स की रोकथाम से जुड़े इस विधेयक को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने का फैसला किया था।
यह फैसला विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों की ओर से उठाई गई आपत्तियों और दिए गए सुझावों के बाद लिया गया। बिल को परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की ओर से विधानसभा में पेश किया था।
सरकार का उद्देश्य इस विधेयक के माध्यम से समाज में नफरत फैलाने वाले भाषणों और अपराधों पर रोक लगाने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।
विपक्षी दलों ने उठाए सवाल
विधेयक को लेकर विधानसभा में कई राजनीतिक दलों ने अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। बीआरएस, बीजेपी और एआईएमआईएम के अलावा कांग्रेस की सहयोगी सीपीआई ने भी बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी।
विपक्षी सदस्यों का कहना था कि कानून बनाते समय इसके प्रावधानों को स्पष्ट और संतुलित रखा जाना चाहिए, ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके।
CPI ने बिल वापस लेने की मांग की थी
सीपीआई विधायक कुनामनेनी संबाशिव राव ने बिल के कुछ प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने मांग की थी कि विधेयक को वापस लिया जाए और इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं।
उन्होंने विशेष रूप से उस प्रावधान पर आपत्ति जताई थी, जिसमें किसी एक सदस्य के बयान के लिए पूरी राजनीतिक पार्टी को जिम्मेदार ठहराने की संभावना जताई गई थी।
उनका कहना था कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत बयान के लिए पूरे संगठन या राजनीतिक दल को जिम्मेदार बनाना उचित नहीं होगा।
कमिटी करेगी विस्तृत समीक्षा
अब 13 सदस्यीय सेलेक्ट कमिटी बिल के हर पहलू की जांच करेगी। कमिटी में विधानसभा के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, ताकि सभी पक्षों की राय सामने आ सके।
कमिटी बिल के कानूनी पहलुओं, संवैधानिक प्रावधानों और राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई चिंताओं का अध्ययन करेगी।
इसके बाद कमिटी अपनी रिपोर्ट विधानसभा में पेश करेगी, जिसके आधार पर बिल में संशोधन या आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सकता है।
सरकार का उद्देश्य
तेलंगाना सरकार का कहना है कि हेट स्पीच और नफरत फैलाने वाले अपराध समाज में शांति और सद्भाव को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए प्रभावी कानून की जरूरत है।
सरकार का तर्क है कि यह विधेयक समाज में सांप्रदायिक तनाव, हिंसा और नफरत फैलाने वाले भाषणों पर नियंत्रण लगाने में मदद करेगा।
हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि कानून बनाते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
राजनीतिक दलों के सुझावों पर होगा विचार
सेलेक्ट कमिटी के गठन के बाद अब सभी दलों को उम्मीद है कि उनके सुझावों और आपत्तियों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
कमिटी की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि विधेयक में किन बदलावों की सिफारिश की जाती है।
मानसून सत्र में आ सकता है अंतिम फैसला
विधानसभा अध्यक्ष ने कमिटी को मानसून सत्र के अंतिम दिन तक रिपोर्ट देने को कहा है। इसके बाद सदन में बिल पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
यदि कमिटी की सिफारिशों को स्वीकार किया जाता है तो विधेयक में बदलाव किए जा सकते हैं। वहीं, रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।
बिल को लेकर जारी है राजनीतिक बहस
हेट स्पीच और हेट क्राइम्स से जुड़ा यह विधेयक तेलंगाना की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार जहां इसे सामाजिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसके कुछ प्रावधानों को लेकर सावधानी बरतने की मांग कर रहा है।
अब सभी की नजर 13 सदस्यीय सेलेक्ट कमिटी की रिपोर्ट पर है, जो इस बिल के भविष्य की दिशा तय करेगी।





