
हैदराबाद: उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने अधिकारियों को विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के अधिकारों की रक्षा और जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव को खत्म करने के लिए व्यापक कानून बनाने का निर्देश दिया है।
उन्होंने अधिकारियों को प्रस्तावित रोहित वेमुला तेलंगाना विधेयक का प्रारंभिक मसौदा तीन महीने के भीतर तैयार करने और इसे वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति (सीएससी) को सौंपने का निर्देश दिया।
भट्टी ने इस बात पर जोर दिया कि समिति के गठन से लेकर विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श तक हर चरण को बिना किसी देरी के निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
प्रस्तावित रोहित वेमुला तेलंगाना विधेयक पर वरिष्ठ सिविल सेवकों की समिति की दूसरी बैठक शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई।
बैठक में प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार करने के लिए अपनाए जाने वाले दृष्टिकोण, समिति की संरचना, कानूनी पहलुओं और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को छात्रों के लिए प्रभावी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट कार्य योजना के साथ आगे बढ़ने का निर्देश दिया।
भट्टी ने सुझाव दिया कि अनुसूचित जाति विकास विभाग (एससीडीडी) को रोहित वेमुला कानून का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने समिति में सभी संबंधित विभागों और संस्थानों को प्रतिनिधित्व प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया और विशेष रूप से निर्देश दिया कि कानून विभाग को सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।
उन्होंने शिक्षा और गृह विभाग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अन्य संबंधित संस्थानों की भागीदारी की जांच करने का भी आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द समिति का गठन करने और मसौदा कानून तैयार करने के लिए आवश्यक जमीनी कार्य तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया।





