
हैदराबाद: श्री त्रिवेणी स्कूल ने शुक्रवार को बहुत उत्साह और पारंपरिक जोश के साथ बथुकम्मा और दशहरा मनाया। छात्रों और स्टाफ ने फूलों से रंग-बिरंगी बथुकम्मा बनाने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में पोटी श्रीरामुलु मेमोरियल अवॉर्ड पाने वाले बोडला मल्लिकार्जुन और मशहूर लेखिका डॉ. बंदारू सुजाता शेखर शामिल हुईं। डॉ. सुजाता शेखर बथुकम्मा पर रिसर्च करने वाली पहली स्कॉलर हैं और उन्हें 'इंटरनेशनल वुमन अचीवर अवॉर्ड' भी मिला है।
स्कूल के डायरेक्टर और कॉरेस्पोंडेंट के. गोवर्धन रेड्डी और प्रिंसिपल एम. शारदा ने भी स्टाफ और छात्रों के साथ मिलकर जश्न मनाया। पारंपरिक कपड़ों में सजे-धजे छात्रों ने इस मौके पर खूब रंग और रौनक बिखेरी।
इस जश्न में बथुकम्मा के सांस्कृतिक महत्व और दशहरा के संदेश—बुराई पर अच्छाई की जीत—को उजागर किया गया। कार्यक्रम का मकसद छात्रों के बीच सांस्कृतिक जागरूकता, एकता और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देना था।





