
हैदराबाद: तेलंगाना में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है। इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को 'बाल, कम उम्र और जबरन विवाह को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' घोषित किया है। केंद्र सरकार ने 2024 में इसी तारीख को 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान शुरू किया था।
'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन' (JRC) के एक बयान में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2019-21 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-5 में राज्य की 20-24 साल की 23.5 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उनकी शादी 18 साल से कम उम्र में हुई थी, जबकि 2023-24 के NFHS-6 में यह आंकड़ा 17.9 प्रतिशत रहा। NFHS-6 के लिए राष्ट्रीय आंकड़ा 20.1 प्रतिशत था।
बच्चों की सुरक्षा और बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने वाली संस्था JRC ने दावा किया कि उसके नौ सहयोगी संगठनों ने पिछले तीन सालों में राज्य में 21,472 बाल विवाह रोकने में मदद की है। संस्था ने बताया कि पूरे भारत में 5.5 लाख से ज़्यादा बाल विवाह रोके गए हैं।
JRC के संस्थापक भुवन रिभु ने बाल विवाह के खिलाफ एक खास अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाने की मांग की थी और मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान इस मांग को फिर से दोहराया था। बाद में सिएरा लियोन ने भारत समेत 67 देशों के समर्थन से यह प्रस्ताव पेश किया। रिभु ने इस घोषणा को "सभी भारतीयों के लिए बहुत गर्व का क्षण" बताया और कहा, "दुनिया हमारी ओर देख रही है, और हमारा काम तो अभी शुरू ही हुआ है।"





