
हैदराबाद: तेलंगाना के नौ दिवसीय पारंपरिक 'बथुकम्मा' उत्सव में, आश्वयुज महीने के आठवें दिन मनाया जाने वाला 'वेनामुड्डाला बथुकम्मा' एक विशेष स्थान रखता है। यह अवसर प्रकृति, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत के बीच गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। इस दौरान महिलाएं एक साथ मिलकर फूलों से बनी सुंदर सजावट करती हैं, पारंपरिक गीत गाती हैं और देवी बथुकम्मा को विशेष भोग (नैवेद्यम) अर्पित करती हैं।
आठवें दिन, बथुकम्मा को मौसमी फूलों—जैसे थंगेडु, गुनुगु, गुलदाउदी, गुलाब और घास के फूलों—से बहुत खूबसूरती से सजाया जाता है। इन फूलों को परतों में इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि वे एक पारंपरिक पिरामिड का आकार ले लेते हैं, जो रंगों और प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत नज़ारा पेश करते हैं। महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ बथुकम्मा को सजाती हैं और उत्सव में शामिल होने के लिए अपने घरों के आंगन या सामुदायिक स्थानों पर इकट्ठा होती हैं।
वे पारंपरिक बथुकम्मा गीत गाती हैं, फूलों की सजावट के चारों ओर गोल घेरे में नृत्य करती हैं और अपने परिवार के सदस्यों तथा पड़ोसियों के साथ मिलकर इस त्योहार का आनंद लेती हैं। ये परंपराएं समुदाय के लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करती हैं और तेलंगाना की समृद्ध लोक परंपराओं को संजोए रखने में मदद करती हैं।
'वेनामुड्डाला बथुकम्मा' की एक खास विशेषता पारंपरिक भोग, जिसे 'नैवेद्यम' कहा जाता है, उसे तैयार करना है। इस दिन धार्मिक अनुष्ठानों के हिस्से के रूप में तिल, मक्खन, घी और गुड़ को मिलाकर देवी बथुकम्मा को अर्पित किया जाता है।
ये सामग्रियां पारंपरिक खान-पान की आदतों को दर्शाती हैं और पोषण तथा अच्छे स्वास्थ्य से जुड़ी हैं। भक्त पूरी आस्था के साथ यह भोग अर्पित करते हैं और अपने परिवारों के स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि के लिए देवी का आशीर्वाद मांगते हैं।
बथुकम्मा केवल फूलों का त्योहार नहीं है; यह नारीत्व, प्रकृति, एकजुटता और तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। हर दिन का अपना अलग महत्व है, जिसमें अलग-अलग तरह के फूल और पारंपरिक भोग शामिल होते हैं। ये साझा अनुष्ठान और उत्सव समुदायों को एक साथ लाते हैं। 'वेनामुड्डाला बथुकम्मा' इसी भक्ति और एकता की भावना को आगे बढ़ाता है।
रंग-बिरंगे फूलों की सजावट, पारंपरिक गीतों और विशेष 'नैवेद्यम' के माध्यम से लोग अपनी विरासत का जश्न मनाते हैं और अपनी परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाते हैं। आठवें दिन का यह उत्सव तेलंगाना की चिरस्थायी परंपराओं, वहां के प्राकृतिक परिवेश की सुंदरता और उस सामूहिक भावना की याद दिलाता है, जो बथुकम्मा को राज्य के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक बनाती है।





