
हैदराबाद: केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी के नेतृत्व में अंबरपेट में बथुकम्मा त्योहार बड़े पैमाने पर मनाया गया, जिससे पूरा इलाका रंगों, संगीत और भक्ति के माहौल से जीवंत हो उठा। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 72 फुट ऊंची बथुकम्मा थी। आयोजकों के अनुसार, इसने एक नया रिकॉर्ड बनाया है और 'यूनिवर्सल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपनी जगह दर्ज कराई है।
इस उत्सव में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और उनकी पत्नी, राज्य भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। फूलों से बनी इस विशाल संरचना के चारों ओर हजारों महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग इकट्ठा हुए, जिन्होंने बथुकम्मा के पारंपरिक गीत गाए और उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सभा को संबोधित करते हुए, किशन रेड्डी ने बथुकम्मा को तेलंगाना की संस्कृति, परंपराओं और आत्म-सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार केवल फूलों का उत्सव नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए गीतों, नृत्य और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से प्रकृति की पूजा करने का एक अवसर है।
उन्होंने कहा कि बथुकम्मा अमीरी-गरीबी, जाति और सामाजिक दर्जे के भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों को एक साथ लाता है। तेलंगाना के गांवों में लंबे समय से लोक गीतों के माध्यम से यह त्योहार मनाया जाता रहा है।
72 फुट ऊंची बथुकम्मा का आयोजन 'देवी फाउंडेशन' के तत्वावधान में किया गया, जो पिछले दो दशकों से अंबरपेट में इस उत्सव का आयोजन कर रहा है। फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीलिमा ने 'यूनिवर्सल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' के प्रतिनिधियों से प्रमाण पत्र प्राप्त किया।
किशन रेड्डी ने बताया कि इस त्योहार का ऐतिहासिक महत्व भी है; यह निजाम के शासन के खिलाफ तेलंगाना के सशस्त्र संघर्ष से जुड़ा हुआ है। उन्होंने देवी से प्रार्थना की कि वे लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाएं और उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और समृद्धि का आशीर्वाद दें। किशन रेड्डी ने लोगों को शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे स्वास्थ्य के साथ देश की सेवा करते रहेंगे और लोगों के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे।
अंबरपेट पारंपरिक बथुकम्मा गीतों से गूंज उठा। उत्सव के परिधानों में सजे प्रतिभागी फूलों की संरचनाओं के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े थे। फूलों की महक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोगों की भारी भीड़ ने इस इलाके को तेलंगाना की विरासत के एक जीवंत केंद्र में बदल दिया।





