
हैदराबाद: दिवाली के दौरान आंखों की चोट के मामले बढ़ने की संभावना को देखते हुए, '108' एम्बुलेंस सेवा ने आंखों की चोट (आई ट्रॉमा) के मामलों के लिए एक विशेष रिस्पॉन्स सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत एम्बुलेंस में खास किट रखी गई हैं और इमरजेंसी स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे मरीजों को आंखों के अस्पताल भेजने से पहले उन्हें प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) दे सकें।
EMRI ग्रीन हेल्थ सर्विसेज और सरोजिनी देवी आई हॉस्पिटल के सहयोग से शुरू की गई इस पहल का मकसद आंखों की चोटों का समय पर इलाज सुनिश्चित करना और हमेशा के लिए दृष्टि खोने (अंधेपन) के खतरे को कम करना है। इसे सबसे पहले हैदराबाद में लागू किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के तहत, 108 एम्बुलेंस में काम करने वाले इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (EMTs) को आंखों की चोटों की पहचान करने और मरीजों को आंखों के विशेष अस्पतालों में ले जाने से पहले उन्हें शुरुआती देखभाल देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। एम्बुलेंस में आंखों की चोट से निपटने के लिए विशेष किट भी उपलब्ध कराई गई हैं।
इस पहल से जुड़े लोगों के अनुसार, आंखों में चोट लगने के बाद मरीजों को अस्पताल पहुंचने में औसतन चार दिन लग जाते हैं, जिससे उनकी दृष्टि वापस आने की संभावना कम हो सकती है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत, 108 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर द्वारा संभाली जाने वाली आपातकालीन स्थितियों की सूची में 'आंखों की चोट' (आई ट्रॉमा) को भी शामिल किया जाएगा। इमरजेंसी रिस्पॉन्स अधिकारियों और इमरजेंसी मेडिकल सर्विस इंस्ट्रक्टरों को भी आंखों की चोटों की पहचान करने और उन्हें संभालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आपातकालीन कॉल को संभालने, मरीजों की स्थिति के आधार पर प्राथमिकता तय करने (ट्राइएजिंग) और अस्पताल पहुंचने से पहले उन्हें जरूरी देखभाल देने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तैयार की जाएंगी। इस कार्यक्रम के तहत डेटा इकट्ठा किया जाएगा और उसका मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि इसे कैसे लागू किया गया और इसके क्या परिणाम रहे।
सरोजिनी देवी आई हॉस्पिटल आंखों की चोटों के प्रबंधन में सहयोग करेगा और सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के भीतर मरीजों को सही इलाज उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि अगर पटाखे से आंख में चोट लग जाए, तो उसे रगड़ें नहीं और न ही उस पर कोई दबाव डालें; इसके बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।





