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Hyderabad हैदराबाद: नेहरू ज़ूलॉजिकल पार्क ने गुरुवार को स्पोर्ट्स विलेज से एक सॉफ्ट-शेल कछुआ और दो लाल कान वाले कछुए प्राप्त किए। यह ट्रांसफर जानवरों की बेहतर देखभाल और सुरक्षित रहने की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया।
अज़ीज़नगर स्थित एकेडेमिया स्पोर्ट्स विलेज में इन रेप्टाइल्स को पिछले दस साल से रखा गया था। चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि अब ये जानवर डिप्टी डायरेक्टर (वेटरनरी) डॉ. मोहम्मद अब्दुल हकीम के सीधे पर्यवेक्षण में रहेंगे, जिससे उनकी देखभाल और स्वास्थ्य प्रबंधन में सुधार होगा।
सॉफ्ट-शेल कछुआ अपनी नरम खोल के कारण संवेदनशील माना जाता है। इसके लिए चिड़ियाघर ने विशेष टैंक, तापमान नियंत्रण और पोषणयुक्त आहार की व्यवस्था की है। वहीं, लाल कान वाले कछुए, जो मीठे पानी में पाए जाते हैं, के लिए साफ और नियंत्रित जलाशय तैयार किए गए हैं, जिसमें जल गुणवत्ता और तापमान का विशेष ध्यान रखा गया है।
स्पोर्ट्स विलेज के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल पशु कल्याण और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर में स्थानांतरण से इन कछुओं को पेशेवर वेटरनरी देखभाल मिलेगी और उन्हें प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार रहने की सुविधा भी मिलेगी।
चिड़ियाघर के अधिकारियों ने यह भी बताया कि आगंतुक इन कछुओं को देख सकते हैं और उनके जीवन और आदतों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे लोक जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। विशेष प्रदर्शनी और जानकारी केंद्र के माध्यम से लोग इन दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के महत्व को समझ सकेंगे।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के ट्रांसफर से यह सुनिश्चित होता है कि दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चिड़ियाघर का वातावरण इन कछुओं के लिए अनुकूल है और इससे उनकी लंबी उम्र और भलाई सुनिश्चित होगी।
चिड़ियाघर प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे इन जानवरों का सम्मान करें और उनके निवास स्थान में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें। आगंतुकों को निर्देशित किया गया है कि वे कछुओं के प्राकृतिक व्यवहार को बनाए रखते हुए उनका अवलोकन करें और शोर या अन्य गतिविधियों से उन्हें परेशान न करें।
इस पहल से यह भी स्पष्ट होता है कि हैदराबाद चिड़ियाघर न केवल वन्यजीवों के संरक्षण में सक्रिय है, बल्कि शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने में भी योगदान दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भविष्य में अन्य दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
कुल मिलाकर, नेहरू ज़ूलॉजिकल पार्क में सॉफ्ट-शेल और लाल कान वाले कछुओं का ट्रांसफर पशु संरक्षण, स्वास्थ्य देखभाल और पर्यावरण शिक्षा का प्रतीक माना जा रहा है। यह पहल न केवल कछुओं के लिए सुरक्षित और संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगी, बल्कि जनता को वन्यजीवों के महत्व और उनकी देखभाल के बारे में भी शिक्षित करेगी।
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