
हैदराबाद: तेलंगाना में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) को लेकर कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं और दोनों ही पार्टियां अपने-अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही हैं।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में धरना देने का ऐलान किया है। पार्टी ने केंद्र सरकार की नीतियों को 'लोकतंत्र विरोधी' बताते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की कोशिशें चल रही हैं और तेलंगाना से कई नेताओं को दिल्ली भेजने की तैयारी है।
कांग्रेस के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, अन्य सभी मंत्री, विधायक, सांसद, एमएलसी, डीसीसी अध्यक्ष, टीपीसीसी प्रमुख, टीपीसीसी के सभी फ्रंटल संगठनों के प्रमुख और पार्टी के सक्रिय नेता दिल्ली जाएंगे। इसके अलावा, विधायकों को रामलीला मैदान में होने वाली रैली के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की जिम्मेदारी दी गई है। तेलंगाना कांग्रेस लगभग 20,000 कार्यकर्ताओं को विशेष ट्रेनों से दिल्ली ले जाने की योजना बना रही है।
वहीं, तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने घोषणा की है कि पार्टी 2 नवंबर को हैदराबाद में एक विशाल 'पदयात्रा' निकालेगी। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह के शामिल होने की उम्मीद है। यह पदयात्रा "लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ" के नारे के साथ निकाली जाएगी।
ये कार्यक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं जब मतदाता सूची के संशोधन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जबकि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया का बचाव किया है। दोनों पार्टियों की ओर से विरोध प्रदर्शन की तैयारियों के चलते, यह मुद्दा अब राजनीतिक टकराव का एक बड़ा केंद्र बन गया है।
बीजेपी तेलंगाना में अपने संगठनात्मक प्रयासों को भी तेज कर रही है। इसका मकसद जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना और अगले विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक उपस्थिति का विस्तार करना है। अमित शाह के प्रस्तावित दौरे से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश आने और संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। 2 नवंबर को समाप्त होने वाले अपने तेलंगाना दौरे के बाद, अमित शाह के 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में एक और बड़ी पदयात्रा में शामिल होने की उम्मीद है। इन कार्यक्रमों के ज़रिए भाजपा नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और कांग्रेस की आलोचनाओं का जवाब देने की कोशिश कर रहा है।
1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस के एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना और अगले दिन हैदराबाद में भाजपा के मार्च की तैयारियों को देखते हुए, आने वाले दिनों में तेलंगाना में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ होने की उम्मीद है। यह विशेष रूप से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची में संशोधन के मुद्दों पर देखने को मिल सकता है।





