
12 अक्टूबर को मनाए जाने वाले 'वर्ल्ड आर्थराइटिस डे' से पहले, अपोलो हॉस्पिटल्स, फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट की कंसल्टेंट रुमेटोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता कायिधि ने कहा कि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन और अकड़न को उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये आर्थराइटिस या जोड़ों की किसी अन्य बीमारी का संकेत हो सकते हैं।
आर्थराइटिस में 100 से ज़्यादा अलग-अलग स्थितियां शामिल हैं जो जोड़ों और उनके आस-पास के ऊतकों (टिश्यू) को प्रभावित करती हैं। जहाँ ऑस्टियोआर्थराइटिस आमतौर पर उम्र बढ़ने से जुड़ा होता है, वहीं रुमेटॉयड आर्थराइटिस, सोरिएटिक आर्थराइटिस और गाउट जैसी सूजन वाली स्थितियां कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
डॉ. सुनीता कायिधि ने कहा, "जोड़ों में लगातार दर्द ही एकमात्र चेतावनी का संकेत नहीं है। सूजन, छूने पर दर्द, हिलने-डुलने में परेशानी और सुबह के समय लंबे समय तक अकड़न - खासकर हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों में - सूजन वाले आर्थराइटिस (इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस) का संकेत हो सकते हैं।"
उन्होंने बताया कि आर्थराइटिस की पहचान विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के आधार पर की जाती है, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट और इमेजिंग की मदद ली जाती है। सूजन वाले आर्थराइटिस का शक होने पर इंफ्लेमेटरी मार्कर्स, रुमेटॉयड फैक्टर और एंटी-CCP एंटीबॉडी जैसे टेस्ट की सलाह दी जा सकती है, जबकि जोड़ों और सॉफ्ट-टिश्यू को हुए नुकसान का पता लगाने के लिए एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या MRI की मदद ली जा सकती है।
इलाज आर्थराइटिस के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। इसमें दर्द और सूजन को नियंत्रित करने वाली दवाएं, बीमारी को बढ़ने से रोकने वाली एंटी-रुमैटिक दवाएं, सही मरीज़ों के लिए बायोलॉजिक या टारगेटेड थेरेपी, साथ ही फिजियोथेरेपी और व्यायाम शामिल हो सकते हैं। जोड़ों को गंभीर नुकसान होने वाले मामलों में, जॉइंट रिप्लेसमेंट (जोड़ बदलने) पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "मरीज़ों को आर्थराइटिस की वजह से शारीरिक गतिविधि पूरी तरह बंद नहीं करनी चाहिए। सही व्यायाम से लचीलापन बढ़ सकता है, मांसपेशियां मज़बूत हो सकती हैं और जोड़ों की कार्यक्षमता बनी रह सकती है। जोड़ों की लंबे समय तक सेहत के लिए स्वस्थ वज़न बनाए रखना, संतुलित आहार लेना और धूम्रपान से बचना भी ज़रूरी है।"
पैदल चलना, तैराकी और साइकिल चलाना जैसी कम ज़ोर वाली गतिविधियां कई मरीज़ों के लिए फायदेमंद हो सकती हैं, हालांकि व्यायाम मरीज़ की स्थिति के अनुसार ही तय किया जाना चाहिए।
हालांकि आर्थराइटिस के सभी प्रकारों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ वज़न बनाए रखने, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने, जोड़ों की चोटों से बचने और लगातार लक्षणों के लिए समय पर डॉक्टरी सलाह लेने से जटिलताओं और विकलांगता को कम किया जा सकता है। डॉ. सुनीता कायिधि ने कहा, "इन्फ्लेमेटरी आर्थराइटिस, खासकर रूमेटॉयड आर्थराइटिस का इलाज न कराने पर जोड़ों को धीरे-धीरे और कभी ठीक न होने वाला नुकसान हो सकता है। लोगों को लगातार होने वाले दर्द और अकड़न को ऐसी चीज़ नहीं मानना चाहिए जिसके साथ उन्हें बस जीना ही है। रूमेटोलॉजिस्ट से जल्द सलाह लेने से बीमारी की वजह का पता लगाने और सही इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है।"





