तेलंगाना

रेवंत रेड्डी की रैली फ्लॉप, सर्वे में बीआरएस आगे, AIMIM से भी नहीं मिला सहयोग

SHIDDHANT
29 Oct 2025 11:33 PM IST
रेवंत रेड्डी की रैली फ्लॉप, सर्वे में बीआरएस आगे, AIMIM से भी नहीं मिला सहयोग
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Hyderabad हैदराबाद। तेलंगाना में सत्ता में आए अभी दो साल भी नहीं हुए कि कांग्रेस पार्टी खुद को जुबली हिल्स उपचुनाव (Jubilee Hills By-Election) में मुश्किल हालात में पाती दिख रही है। हाई-प्रोफाइल इस सीट पर कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है, लेकिन अंदरूनी सर्वे और घटती जनसमर्थन ने पार्टी के संकट को और गहरा कर दिया है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) खुद चुनाव अभियान की कमान संभाले हुए हैं, मगर मंगलवार को फिल्म वर्कर्स के लिए आयोजित उनका कार्यक्रम बुरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। रेवंत रेड्डी की मौजूदगी के बावजूद कार्यक्रम में बेहद कम लोग पहुंचे, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा फैल गई।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री ने देर रात तक अपने मंत्रियों और चुनाव प्रबंधकों के साथ बैठक की, ताकि “नुकसान नियंत्रण” (damage control) किया जा सके और समझा जा सके कि गलती कहां हुई। बीआरएस उम्मीदवार सर्वे में आगे स्थिति तब और असहज हो गई जब कांग्रेस के ही एक मंत्री के मीडिया हाउस द्वारा कराए गए सर्वे ने दिखाया कि बीआरएस उम्मीदवार कांग्रेस से 8 प्रतिशत आगे चल रहा है। यह नतीजा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह सीट पहले बीआरएस के दिवंगत विधायक मगंती गोपीनाथ के निधन के बाद खाली हुई थी। कांग्रेस इसे बीआरएस के गढ़ में अपनी पैठ मजबूत करने का अवसर मान रही थी।
रेवंत रेड्डी की “फेलिसिटेशन रैली” से निराशा रेवंत रेड्डी द्वारा फिल्म कर्मियों और हस्तियों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में भीड़ न जुटना कांग्रेस नेतृत्व के लिए शर्मिंदगी का कारण बना। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने स्वीकार किया — “यह कार्यक्रम पूरी तरह फ्लॉप रहा। इससे मुख्यमंत्री की लोकप्रियता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। AIMIM ने किया दूरी, अल्पसंख्यक वोट पर संकट इस सीट पर अल्पसंख्यक वोट बैंक अहम भूमिका निभाता है, लेकिन AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केवल एक बार प्रचार में हिस्सा लिया और फिर बिहार चुनाव अभियान के लिए रवाना हो गए। कांग्रेस में इसे AIMIM की “जानबूझकर की गई दूरी” के रूप में देखा जा रहा है। इससे पार्टी में यह आशंका बढ़ गई है कि मुस्लिम मतदाता या तो मतदान से दूर रह सकते हैं या बीआरएस की ओर झुकाव दिखा सकते हैं।
अजहरुद्दीन को मंत्री पद का ऑफर — डैमेज कंट्रोल की कोशिश
वोट बैंक को साधने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने आखिरी दांव खेला है। पार्टी ने पूर्व क्रिकेटर और वरिष्ठ नेता मो. अजहरुद्दीन (Mohammed Azharuddin) को कैबिनेट में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे अल्पसंख्यक समुदाय को साधने की “आखिरी कोशिश” मान रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का कहना है कि बीआरएस के 10 साल के शासन की विकास विरासत अब भी जनता के बीच प्रभावशाली बनी हुई है, जबकि कांग्रेस की घोषणाओं को लोग गंभीरता से नहीं ले रहे। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की यह बेचैनी संकेत देती है कि पार्टी के लिए जुबली हिल्स की जंग बेहद कठिन हो चुकी है।
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