
Telangana तेलंगाना: शहर में एक वयस्क रीसस मकाक को अवैध रूप से बंदी बनाकर और जंजीरों से बांधकर सर्कस में शो के लिए इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। एक जागरूक नागरिक की शिकायत के बाद इस घटना का खुलासा हुआ, जिसके बाद पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने स्थानीय पशु अधिकार कार्यकर्ता गायत्री सांगुओ, हैदराबाद पुलिस और हैदराबाद फॉरेस्ट डिवीजन के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की और बंदर को रेस्क्यू किया।
जानकारी के अनुसार, जानवर को सर्कस में प्रदर्शन के लिए रखा गया था और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा था। इसे कई जानवर संरक्षण कानूनों का उल्लंघन माना जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बंदर को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और देखभाल के लिए पीपल फॉर एनिमल्स हैदराबाद के शेल्टर होम में भेजा गया है।
फॉरेस्ट विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जानवर की स्थिति की जांच की जा रही है और उसे जल्द ही उसके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विशेषज्ञों की निगरानी में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बंदर पूरी तरह स्वस्थ हो और प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रूप से रह सके।
PETA इंडिया और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि जंगली जानवरों का इस तरह मनोरंजन या प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
भारत में शो और सर्कस में बंदरों का उपयोग पहले से ही प्रतिबंधित है। वर्ष 1998 में केंद्र सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 के तहत धारा 22 के अंतर्गत नोटिफिकेशन जारी कर बंदरों के प्रदर्शन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना कानून के उल्लंघन और जागरूकता की कमी को दर्शाता है।
पुलिस और वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि बंदर को किस तरह और किसके माध्यम से सर्कस में लाया गया था। संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि वन्यजीवों के संरक्षण और उनके अधिकारों के प्रति सख्ती से पालन और निगरानी की आवश्यकता है, ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके।





