
Telangana तेलंगाना: सिंगुर मल्टी पर्पस प्रोजेक्ट के आयाकट किसानों को एक बार फिर फसल संकट का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि बांध पर चल रहा मरम्मत कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। नेशनल डैम सेफ्टी अथॉरिटी (NDSA) की चेतावनी के बाद शुरू किए गए कार्यों में देरी के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मार्च 2025 में NDSA की टीम ने इस परियोजना का निरीक्षण किया था, जिसके बाद सिंचाई विभाग ने बांध के रिवेटमेंट और क्रेस्ट गेट की मरम्मत का कार्य शुरू किया। इसके लिए लगभग 22 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। विभाग ने पिछले वर्ष दिसंबर तक धीरे-धीरे परियोजना से पानी खाली कराकर मरम्मत कार्य की शुरुआत की थी।
सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने पहले ही कॉन्ट्रैक्टर और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि 2026 के वनकालम सीजन की शुरुआत से पहले मरम्मत कार्य पूरा किया जाए, लेकिन अब तक अधिकांश काम अधूरा पड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में केवल लगभग 50 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।
इस देरी के पीछे फंड जारी होने में विलंब को एक बड़ा कारण बताया जा रहा है, जिसके चलते कॉन्ट्रैक्टर समय पर काम पूरा नहीं कर सका। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से भी परियोजना की गति प्रभावित हुई है।
इधर, पानी के स्तर में गिरावट के कारण स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। जून के पहले सप्ताह में जब जल भंडारण 5 TMCft से नीचे चला गया, तब हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (HMWSSB) ने शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए आपातकालीन पंपिंग शुरू कर दी।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध जल केवल जुलाई तक ही पर्याप्त रह सकता है। इसके बाद पानी की गंभीर कमी का खतरा पैदा हो सकता है, जिससे किसानों के साथ-साथ शहरी जल आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि परियोजना की देरी का सीधा असर उनकी फसलों पर पड़ रहा है। समय पर सिंचाई न मिलने से इस बार भी खेती प्रभावित होने की आशंका है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो सकती है।
सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार, मंत्री जल्द ही मरम्मत कार्य की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक करेंगे। इस बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि मौजूदा सीजन में परियोजना में कितना पानी संग्रहित किया जा सकता है और आगे की रणनीति क्या होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मरम्मत कार्य समय पर पूरा नहीं होता है, तो आने वाले महीनों में न केवल किसानों को बल्कि शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था को भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें आने वाली समीक्षा बैठक पर टिकी हुई हैं, जहां इस महत्वपूर्ण परियोजना के भविष्य को लेकर अहम फैसले लिए जाने की उम्मीद है।





