तेलंगाना

रामागुंडम NTPC बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर सोलर प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू

Kavita2
2 July 2026 3:13 PM IST
रामागुंडम NTPC बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर सोलर प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू
x

Assam असम: रामागुंडम स्थित NTPC बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर पर विकसित 176 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्रोजेक्ट अब पूरी तरह से कमर्शियल प्रोडक्शन के चरण में पहुंच गया है। इस प्रोजेक्ट की अंतिम 41.6 मेगावाट यूनिट ने मंगलवार को व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया, जिसके साथ यह पूरा सोलर कॉम्प्लेक्स अब पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन करने लगा है।

यह परियोजना दो प्रमुख हिस्सों में विकसित की गई है, जिसमें 56 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट और 120 मेगावाट का सरफेस-माउंटेड सोलर प्लांट शामिल है। दोनों हिस्सों को मिलाकर कुल 176 मेगावाट की क्षमता तैयार की गई है, जो नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इससे पहले भी NTPC ने इसी बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर पर 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट विकसित किया था, जो पिछले तीन वर्षों से पूरी क्षमता पर सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। इस सफल मॉडल के आधार पर ही कंपनी ने इस विस्तार परियोजना की शुरुआत की थी, जिसे अब पूरी तरह से कमर्शियल रूप से चालू कर दिया गया है।

इस 176 मेगावाट के संयुक्त सोलर प्रोजेक्ट के विभिन्न चरणों को अलग-अलग समय पर शुरू किया गया। पहले चरण में 100 मेगावाट का कमर्शियल उत्पादन 2 मई को शुरू हुआ था। इसके बाद दूसरे चरण में 34.4 मेगावाट क्षमता 29 मई को चालू की गई। अंततः अंतिम 41.6 मेगावाट यूनिट ने मंगलवार को उत्पादन शुरू कर दिया, जिससे पूरी परियोजना अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है।

इस प्रोजेक्ट के पूरी तरह चालू होने के साथ NTPC की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। कंपनी की कुल इंस्टॉल्ड पावर जेनरेशन कैपेसिटी अब बढ़कर 90,899 मेगावाट हो गई है, जबकि कमर्शियल पावर जेनरेशन कैपेसिटी 89,819 मेगावाट तक पहुंच गई है।

रामागुंडम NTPC बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर पर पहले से संचालित 156 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट दक्षिण भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट माना जाता है। इस तरह के प्रोजेक्ट जल स्रोतों का उपयोग करते हुए बिजली उत्पादन करने की आधुनिक तकनीक को दर्शाते हैं, जिससे भूमि की बचत होती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

फ्लोटिंग सोलर तकनीक में पैनलों को पानी की सतह पर स्थापित किया जाता है, जिससे पानी का वाष्पीकरण कम होता है और पैनलों की दक्षता भी बेहतर बनी रहती है। वहीं सरफेस-माउंटेड सोलर प्लांट जमीन पर स्थापित पारंपरिक सौर ऊर्जा प्रणाली का हिस्सा है, जो बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है।

NTPC की यह परियोजना भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। देश में बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ स्रोतों का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की हाइब्रिड सोलर परियोजनाएं भविष्य में ऊर्जा उत्पादन का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकती हैं, क्योंकि इनमें जल और भूमि दोनों संसाधनों का प्रभावी उपयोग होता है।

NTPC का यह प्रोजेक्ट न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता मिलेगी।

कुल मिलाकर, रामागुंडम का यह 176 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम योगदान देगा।

Next Story