तेलंगाना

तेलंगाना में एल नीनो पर सियासी घमासान, कांग्रेस सरकार पर भड़के रावुला श्रीधर

Ratna Netam
24 Oct 2026 5:37 PM IST
तेलंगाना में एल नीनो पर सियासी घमासान, कांग्रेस सरकार पर भड़के रावुला श्रीधर
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हैदराबाद। तेलंगाना में एल नीनो के संभावित प्रभाव और सूखे जैसे हालात को लेकर राजनीति तेज हो गई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की ओर से इस मौसमी घटना के संभावित असर पर बैठक किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। प्रवक्ता रावुला श्रीधर ने शनिवार को कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य की समस्याओं का समाधान खोजने के बजाय कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में श्रीधर ने कहा कि सरकार को एल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर जनता में भरोसा पैदा करना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल बैठकें और भाषण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सरकार को पानी, बिजली और कृषि से जुड़ी संभावित समस्याओं से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
मुख्यमंत्री पर राजनीतिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने का आरोप
रावुला श्रीधर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी एल नीनो से पैदा होने वाली संभावित समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में ज्यादा व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी राज्य की जनता को संभावित संकट से निपटने के लिए तैयार करना और उन्हें भरोसा दिलाना है।श्रीधर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने बयानों के जरिए लोगों में चिंता पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को भय का माहौल बनाने के बजाय जनता को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी की जा रही है।हालांकि, श्रीधर के ये आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई विस्तृत प्रमाण पेश नहीं किया।
एल नीनो को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एल नीनो के संभावित प्रभाव को गंभीर चुनौती बताते हुए अधिकारियों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार की समीक्षा बैठकों में कम बारिश, जलाशयों में पानी की उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और बिजली की मांग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है।सरकार का कहना है कि संभावित संकट से निपटने के लिए अलग-अलग विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने किसानों और आम नागरिकों से भी पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने तथा परिस्थितियों को देखते हुए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है।
खेती, पानी और बिजली की उपलब्धता बड़ी चुनौती
एल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है, जो दुनिया के कई क्षेत्रों के मौसम और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। भारत में इसका असर मानसूनी बारिश की स्थिति पर पड़ सकता है, हालांकि इसका प्रभाव हर वर्ष और हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता।तेलंगाना में बारिश की कमी को देखते हुए कृषि, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता जताई गई है। यदि सूखे जैसे हालात लंबे समय तक बने रहते हैं, तो किसानों को फसल संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा जलाशयों में पानी की उपलब्धता और बिजली की बढ़ती मांग भी चुनौती बन सकती है।इसी कारण राज्य सरकार ने संभावित प्रभावों का आकलन करने और राहत उपायों की तैयारी के लिए मंत्रियों तथा अधिकारियों की बैठकें आयोजित की हैं।
समाधान और भरोसे को लेकर सरकार से सवाल
रावुला श्रीधर ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार को जनता को भरोसा दिलाना चाहिए कि संभावित समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि केवल बैठकों और सार्वजनिक बयानों से स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर तैयारी और कामकाज जरूरी है।दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि वह पानी, कृषि और बिजली की चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से योजना बना रही है और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।इस तरह तेलंगाना में एल नीनो का संभावित असर अब मौसम और कृषि से जुड़े विषय के साथ-साथ राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है। आने वाले समय में बारिश की स्थिति और सरकार की तैयारियों के आधार पर इस मुद्दे पर चर्चा और तेज हो सकती है।
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