
Telangana तेलंगाना: तेलंगाना की राजनीति में मंगलवार को उस समय गर्माहट बढ़ गई जब राज्य के वन मंत्री कोंडा सुरेखा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्य नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाए। वारंगल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि बीजेपी का राज्य नेतृत्व केवल सार्वजनिक बैठकों और “जय श्री राम” जैसे नारों तक सीमित है, जबकि केंद्र सरकार से राज्य के लिए फंड और योजनाएं लाने में कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है।
कोंडा सुरेखा ने अपने भाषण में कहा कि केवल नारे लगाने से राज्य का विकास नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या “जय श्री राम” के नारे से राज्य को केंद्र से कोई फंड या योजना मिलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता मोदी को भाषणों में आमंत्रित करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्यों या वित्तीय सहायता के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं करते।
सुरेखा ने यह भी दावा किया कि राज्य के दो केंद्रीय मंत्री — जी. किशन रेड्डी और बंदी संजय कुमार — केंद्र से तेलंगाना के लिए फंड लाने में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के साथ कथित “अन्याय” होने के बावजूद ये नेता चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वन मंत्री के इन बयानों के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया आई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सुरेखा के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि हिंदुत्व पर हमला करना अब “फ्री पास” नहीं माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिए जा रहे हैं और इससे जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार तेलंगाना सहित सभी राज्यों को योजनाओं और विकास कार्यों के लिए बराबर सहयोग देती है।
इस बयानबाज़ी के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर अन्य बीजेपी नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है, जबकि राज्य सरकार की ओर से भी अपने रुख को और स्पष्ट किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, यह विवाद तेलंगाना की राजनीति में नए सियासी तनाव को दर्शाता है, जहां विकास के मुद्दों के साथ-साथ धार्मिक और वैचारिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है।





