
हैदराबाद। 17 सितंबर 1948 को निजाम के शासन वाले हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में विलय की वर्षगांठ गुरुवार को अलग-अलग राजनीतिक दृष्टिकोण के साथ मनाई गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस दिन को “79वां हैदराबाद मुक्ति दिवस” के रूप में मनाया, जबकि कुछ अन्य राजनीतिक दलों और संगठनों ने इसे “जन-शासन दिवस” के तौर पर आयोजित किया।
इस तारीख को लेकर तेलंगाना की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग विचार रहे हैं। विभिन्न दल अपने-अपने नजरिए के अनुसार इस दिन को अलग-अलग नामों और कार्यक्रमों के साथ मनाते रहे हैं।
17 सितंबर का ऐतिहासिक महत्व
17 सितंबर 1948 को हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में विलय हुआ था। उस समय हैदराबाद पर निजाम का शासन था।
भारत की आजादी के बाद देश की कई रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया चली। इसी क्रम में हैदराबाद राज्य का भी भारतीय संघ में शामिल होना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।
इस घटना को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों की अपनी-अपनी व्याख्या रही है।
केंद्र सरकार ने घोषित किया तेलंगाना मुक्ति दिवस
केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में 17 सितंबर को आधिकारिक रूप से “तेलंगाना मुक्ति दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
इसके बाद से केंद्र सरकार की ओर से इस अवसर पर आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भाजपा और उसके नेताओं की ओर से इस दिन को हैदराबाद के भारतीय संघ में विलय और मुक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
भाजपा ने मनाया हैदराबाद मुक्ति दिवस
गुरुवार को भाजपा की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
पार्टी नेताओं ने इस दिन को ऐतिहासिक घटना बताते हुए हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में शामिल होने को याद किया।
कार्यक्रमों में स्वतंत्रता सेनानियों और ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया गया।
अन्य दलों ने मनाया जन-शासन दिवस
वहीं, राज्य के कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने इस दिन को “जन-शासन दिवस” के रूप में मनाया।
इन दलों का जोर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना और जनता की भूमिका पर रहा।
तेलंगाना में लंबे समय से इस दिन को लेकर राजनीतिक मतभेद देखने को मिलते रहे हैं।
वर्षों से अलग-अलग नामों से आयोजन
17 सितंबर को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं।
कुछ दल इसे हैदराबाद मुक्ति दिवस कहते हैं, जबकि कुछ इसे विलय दिवस या जन-शासन दिवस के रूप में मनाते हैं।
यह अंतर राज्य की राजनीति और ऐतिहासिक घटनाओं की अलग-अलग व्याख्याओं से जुड़ा हुआ है।
ऐतिहासिक घटनाओं पर राजनीतिक बहस
हैदराबाद के भारतीय संघ में विलय की घटना को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस होती रही है।
विभिन्न दल इस घटना को अपने-अपने नजरिए से देखते हैं और उसी के अनुसार कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
तेलंगाना में जारी है राजनीतिक चर्चा
17 सितंबर का आयोजन तेलंगाना की राजनीति में हर साल चर्चा का विषय बनता है।
जहां भाजपा इसे मुक्ति और राष्ट्रीय एकीकरण से जोड़ती है, वहीं अन्य दल इसे अलग संदर्भों में प्रस्तुत करते हैं।
सरकारी कार्यक्रमों में ऐतिहासिक स्मरण
केंद्र सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में विलय से जुड़ी घटनाओं को याद किया जाता है।
इन आयोजनों का उद्देश्य लोगों को उस दौर के इतिहास से परिचित कराना बताया जाता है।
अलग-अलग विचारों के बीच मनाया गया दिवस
इस वर्ष भी 17 सितंबर को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए।
एक ओर केंद्र सरकार और भाजपा ने इसे हैदराबाद मुक्ति दिवस के रूप में मनाया, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों ने इसे जन-शासन दिवस के तौर पर मनाया।
इस तरह ऐतिहासिक महत्व रखने वाली यह तारीख तेलंगाना में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बनी रही।





