
Telangana तेलंगाना: तेलंगाना में राज्य के कर्ज को लेकर चल रही राजनीतिक बहस शुक्रवार को भी तेज रही। भारत राष्ट्र समिति (Bharat Rashtra Samithi) के वरिष्ठ नेता और डिप्टी फ्लोर लीडर टी. हरीश राव ने राज्य के आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव पर कर्ज से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिए जा रहे अलग-अलग आंकड़े खुद ही विरोधाभासी हैं, जिससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है।
हरीश राव ने मंत्री के एक ओपन लेटर का जवाब देते हुए प्रेस वार्ता में एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन जारी किया और व्हाट्सएप के माध्यम से विधानसभा कार्यवाही और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) के डेटा से जुड़े दस्तावेज साझा किए। उनका कहना था कि सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े वास्तविक आर्थिक स्थिति को नहीं दर्शाते हैं।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के कर्ज को लेकर दिए गए आंकड़ों में गंभीर विसंगतियां हैं। हरीश राव के अनुसार, मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव के हालिया पत्र में बताया गया है कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य का उधार लगभग 1,77,058 करोड़ रुपये है, जबकि RBI के डेटा के अनुसार 30 जून 2026 तक यह आंकड़ा 1,86,067 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) ने 18 मार्च को विधानसभा में राज्य का कुल कर्ज 3,47,294 करोड़ रुपये बताया था। इस अंतर को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग आंकड़े क्यों पेश कर रही है।
हरीश राव ने मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें नैतिक साहस और आत्मसम्मान है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को गुमराह करने के लिए आंकड़ों का चयनात्मक उपयोग कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक आंकड़ों में इस तरह की असंगति राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और इससे नीति निर्माण पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि सरकार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट और एकीकृत डेटा जारी करे, ताकि स्थिति पर भ्रम खत्म हो सके।
कांग्रेस और BRS के बीच यह विवाद लगातार राजनीतिक रूप लेता जा रहा है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज के आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता की कमी से राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस ताजा आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, विपक्ष ने इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक बहसों में और तेज करने के संकेत दिए हैं।





